अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान ने भारत की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। ट्रंप ने दावा किया है कि भारत अब ईरान की बजाय वेनेजुएला से तेल खरीदेगा। यह बयान उन्होंने एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान दिया, जहां उन्होंने कहा कि “हमने पहले ही उस डील का कॉन्सेप्ट बना लिया है।” ट्रंप का यह दावा ऐसे वक्त आया है जब अमेरिका वेनेजुएला के तेल को ग्लोबल मार्केट में आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, ताकि रूस और ईरान से तेल आयात पर निर्भरता कम की जा सके।
ट्रंप के बयान पर कांग्रेस का हमला, सरकार से सवाल
ट्रंप ने यह भी कहा कि वेनेजुएला अमेरिका को 30 से 50 मिलियन बैरल तेल देगा, जिसे अमेरिका रिफाइन कर के बेचेगा और भारत को वेनेजुएला से तेल खरीदने की इजाजत दी जाएगी। एक सीनियर अमेरिकी अधिकारी ने भी इशारों में माना है कि ट्रंप प्रशासन अमेरिकी नियंत्रण वाले फ्रेमवर्क के तहत भारत को वेनेजुएला का तेल बेचने को तैयार है। माना जा रहा है कि यह कदम यूक्रेन युद्ध के बाद रूस से भारत के तेल आयात पर बढ़ते अमेरिकी दबाव के बीच उठाया गया है। ट्रंप पहले भी भारत के रूसी तेल खरीदने पर नाराजगी जता चुके हैं, लेकिन अब वेनेजुएला को विकल्प के तौर पर पेश कर रहे हैं।
कांग्रेस का सरकार पर हमला
इस बयान के बाद कांग्रेस ने मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस ने एक्स पर पोस्ट कर सवाल किया कि क्या अब विदेशी राष्ट्रपति भारत की नीतियां तय करेंगे और हमारी स्वतंत्र विदेश नीति कहां गई। पार्टी ने तंज कसते हुए पूछा कि ट्रंप के सामने चुप रहने का ऐसा कौन सा “सीक्रेट” है जो “आईटी वर्क्ड” की तरह काम कर रहा है। कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने भी सवाल उठाया कि क्या भारत के साथ भी वेनेजुएला जैसा व्यवहार हो सकता है।
फिलहाल सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। जानकारों का मानना है कि यह पूरा मामला अमेरिका की वेनेजुएला नीति से जुड़ा है, जहां तेल पर नियंत्रण बड़ा फैक्टर है। वहीं सोशल मीडिया पर बहस तेज है—कुछ लोग इसे भारत के लिए सस्ता तेल पाने का मौका बता रहे हैं, तो कुछ इसे विदेश नीति पर दबाव के तौर पर देख रहे हैं।