पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। राज्य स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक 23 जनवरी तक निपाह वायरस (NiV) के पुष्ट मामलों की संख्या बढ़कर पांच हो गई है। इनमें नर्स और डॉक्टर जैसे स्वास्थ्य कर्मी भी शामिल हैं, जो एक निजी अस्पताल में काम कर रहे थे। यह प्रकोप उत्तर 24 परगना जिले के बरसात इलाके से शुरू हुआ, जहां सबसे पहले दो नर्सों में संक्रमण की पुष्टि हुई थी।
शुरुआती मामले 11–12 जनवरी के आसपास सामने आए थे, जब दो स्वास्थ्य कर्मियों में बुखार और अन्य लक्षण दिखे। इसके बाद कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग के दौरान तीन और लोग संक्रमित पाए गए। फिलहाल करीब 100 लोगों को होम क्वारंटाइन में रखा गया है, जो संक्रमित मरीजों के संपर्क में आए थे। हालात को देखते हुए केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय संयुक्त प्रकोप प्रतिक्रिया टीम को राज्य में तैनात कर दिया है, जो राज्य स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर जांच और निगरानी का काम कर रही है।
निपाह कितना खतरनाक और क्या रखें सावधानी
निपाह वायरस एक बेहद खतरनाक जूनोटिक वायरस माना जाता है, जो आमतौर पर फ्रूट बैट यानी चमगादड़ों से फैलता है। यह वायरस इंसान से इंसान में भी फैल सकता है, खासकर लार, खांसी या बहुत नजदीकी संपर्क के जरिए। इसके लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, उल्टी, सांस लेने में दिक्कत और गंभीर मामलों में दिमाग में सूजन तक शामिल है। इसकी मृत्यु दर 40 से 75 फीसदी तक बताई जाती है और फिलहाल न तो इसका कोई टीका है और न ही कोई पक्का इलाज, सिर्फ सहायक उपचार ही उपलब्ध है।
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। कच्चे खजूर के रस या ताड़ी के सेवन से बचने, चमगादड़ों द्वारा काटे गए या गिरे हुए फल न खाने, बीमार लोगों से दूरी रखने और मास्क व सैनिटाइजर के इस्तेमाल की सलाह दी गई है। किसी भी तरह के लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने को कहा गया है। राहत की बात यह है कि अब तक किसी की मौत की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन हालात पर लगातार कड़ी नजर रखी जा रही है।