डेनमार्क और अमेरिका के बीच ग्रीनलैंड को लेकर तनाव अचानक काफी बढ़ गया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप किसी भी कीमत पर ग्रीनलैंड को हासिल करना चाहते हैं और इस दिशा में लगातार दबाव बढ़ाते नजर आ रहे हैं। इसे लेकर वह बार-बार चेतावनी दे रहे हैं। हालांकि, यूरोप के लगभग सभी देशों ने डेनमार्क के समर्थन में खड़े होने का फैसला किया है और ट्रंप को सीधे शब्दों में सख्त संदेश दिया है।
यूरोप के इस कदम से ट्रंप पूरी तरह बौखलाए हुए दिखाई दे रहे हैं और आनन-फानन में उन्होंने यूरोप के आठ बड़े देशों पर 10 फीसदी टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया। वहीं, ट्रंप के ही पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एच.आर. मैकमास्टर ने इस फैसले को बेतुका करार दिया है।
बता दे रिपोर्ट्स के मुताबिक डेनमार्क के रक्षा मंत्रालय ने अपने सैनिकों को साफ निर्देश दिए था कि अगर अमेरिका ग्रीनलैंड पर जबरन कब्जा करने की कोशिश करता है, तो “पहले गोली चलाओ, बाद में सवाल पूछो।” यह सख्त आदेश ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार ग्रीनलैंड को अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से अहम बताते हुए उस पर नियंत्रण की इच्छा जता रहे हैं। ग्रीनलैंड भले ही भौगोलिक रूप से दूर हो, लेकिन डेनमार्क के लिए यह उसकी संप्रभुता और सम्मान से जुड़ा मुद्दा है।
ट्रंप के इस नए ऐलान के बाद फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि, “ना तो यूक्रेन में, ना ही ग्रीनलैंड में और ना ही कहीं और किसी भी परिस्थिति में कोई धमकी या दबाव हमें प्रभावित नहीं कर सकता।”
मैक्रों ने टैरिफ धमकियों को ‘अस्वीकार्य’ करार देते हुए कहा कि अगर ये धमकियां वास्तव में लागू होती हैं, तो यूरोपीय देश एकजुट और समन्वित तरीके से इसका जवाब देंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि यूरोप अपनी संप्रभुता की रक्षा करेगा।
मैक्रों ने यह भी बताया कि फ्रांस, डेनमार्क के साथ मिलकर ग्रीनलैंड में चल रहे सैन्य अभ्यास में शामिल है, क्योंकि यह आर्कटिक क्षेत्र और यूरोप की सीमाओं की सुरक्षा से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने ट्रंप की टैरिफ धमकियों को पूरी तरह गलत करार दिया है। उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड डेनमार्क का हिस्सा है और उसका भविष्य केवल ग्रीनलैंड के लोगों और डेनमार्क के फैसले पर ही निर्भर करता है।
स्टार्मर ने आगे कहा कि आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा NATO के सभी सहयोगी देशों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और रूस से उत्पन्न खतरे से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि जो देश सामूहिक सुरक्षा के लिए मिलकर काम कर रहे हैं, उन NATO सहयोगियों पर टैरिफ लगाना पूरी तरह अनुचित और गलत कदम है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही यह आदेश शीत युद्ध के समय का हो, लेकिन आज इसे अमेरिकी धमकियों के संदर्भ में दोहराया जाना दिखाता है कि हालात कितने संवेदनशील हो चुके हैं। ग्रीनलैंड की रणनीतिक अहमियत, वहां मौजूद प्राकृतिक संसाधन और आर्कटिक क्षेत्र में उसकी स्थिति इस विवाद को और जटिल बना रही है। फिलहाल अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन व्हाइट हाउस के सूत्र मानते हैं कि ट्रंप प्रशासन ग्रीनलैंड को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम मानता है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा वैश्विक राजनीति में और हलचल मचा सकता है।