शनिवार को लंदन में बांग्लादेश उच्चायोग के बाहर हिंदू समुदायों द्वारा आयोजित एक शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन उस समय तनावपूर्ण हो गया, जब खालिस्तानी समर्थकों के एक छोटे समूह ने जवाबी प्रदर्शन कर उसे बाधित करने की कोशिश की। यह प्रदर्शन 18 दिसंबर को बांग्लादेश के मयमनसिंह में कपड़ा मजदूर दीपू चंद्र दास की लिंचिंग की निंदा और बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर बढ़ते उत्पीड़न के खिलाफ आयोजित किया गया था।
करीब 500 से अधिक प्रदर्शनकारियों, जिनमें अधिकांश भारतीय और बांग्लादेशी मूल के हिंदू थे, ने “हिंदुओं का जीवन मायने रखता है” जैसे नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों ने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और हिंदू भिक्षु चिनमोय कृष्ण दास की रिहाई की मांग करते हुए पोस्टर उठाए, जबकि एक डिजिटल वैन पर “हिंदुओं को जीने का अधिकार है” जैसे संदेश प्रदर्शित किए गए। बंगाली हिंदू आदर्श संघ (यूके) द्वारा आयोजित यह विरोध पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा और प्रतिभागी पुलिस बैरिकेड के पीछे खड़े रहे।
हालांकि स्थिति तब बिगड़ी जब पीले खालिस्तानी झंडे लिए एक समूह वहां पहुंचा और भारत-विरोधी व हिंदू-विरोधी नारे लगाने लगा। पुलिस ने तुरंत हस्तक्षेप कर दोनों पक्षों को अलग किया और हालात को काबू में रखा। आयोजक प्रज्ज्वल बिस्वास ने कहा कि खालिस्तानी समर्थकों का इस मुद्दे से कोई लेना-देना नहीं है और वे केवल उकसावे की कोशिश कर रहे थे।
प्रदर्शन में शामिल बांग्लादेश मूल की शुचिष्मिता ने कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार लंबे समय से जारी हैं, लेकिन इस पर वैश्विक मीडिया चुप रहता है। उन्होंने कहा कि अब इसे और बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
यह विरोध ऐसे समय में हुआ है, जब बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की घटनाओं को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ रही है। भारत ने भी इस मुद्दे को औपचारिक रूप से उठाते हुए अल्पसंख्यकों के खिलाफ जारी हिंसा को गंभीर चिंता का विषय बताया है।