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Reading: रूस के ड्रोन अटैक से कमजोर पड़ा चेरनोबिल शील्ड… IAEA बोला— “रेडिएशन कंट्रोल में, लेकिन भविष्य अनिश्चित”
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रूस के ड्रोन अटैक से कमजोर पड़ा चेरनोबिल शील्ड… IAEA बोला— “रेडिएशन कंट्रोल में, लेकिन भविष्य अनिश्चित”

news desk
Last updated: December 18, 2025 4:54 pm
news desk
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चेरनोबिल ड्रोन अटैक
चेरनोबिल ड्रोन अटैक
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दुनिया की सबसे खौफनाक न्यूक्लियर त्रासदियों में से एक चेरनोबिल एक बार फिर सुर्खियों में है। वजह है वहां बने करीब 2 अरब डॉलर के हाई-टेक प्रोटेक्टिव गुंबद—न्यू सेफ कन्फाइनमेंट (NSC)—में आई गंभीर दरार। संयुक्त राष्ट्र की न्यूक्लियर निगरानी एजेंसी IAEA ने पुष्टि की है कि फरवरी 2025 में हुए एक ड्रोन हमले के बाद यह गुंबद अब अपनी सबसे अहम जिम्मेदारी, यानी रेडियोएक्टिव सामग्री को पूरी तरह रोकने की क्षमता, खो चुका है। इस खुलासे के बाद दुनिया भर में चिंता बढ़ गई है।

IAEA के मुताबिक, फरवरी में एक ड्रोन—जिसे यूक्रेन ने रूसी शाहेद-136 बताया—ने गुंबद की छत को निशाना बनाया था। हमले के बाद वहां आग लगी और बड़ी दरार बन गई। दिसंबर 2025 में हुई ताजा जांच में सामने आया कि गुंबद की बाहरी और अंदरूनी परतें दोनों ही क्षतिग्रस्त हैं, यानी अब यह पूरी तरह सील नहीं रह गया है। राहत की बात यह है कि इसकी मुख्य संरचना और मॉनिटरिंग सिस्टम अभी सुरक्षित हैं और फिलहाल रेडिएशन स्तर सामान्य बताया जा रहा है। IAEA प्रमुख राफेल मारियानो ग्रोसी ने साफ कहा है कि अस्थायी मरम्मत से काम नहीं चलेगा, लंबी अवधि की न्यूक्लियर सुरक्षा के लिए पूरी मरम्मत जरूरी है।

आगे कितना बड़ा है खतरा !

यह गुंबद 2016 से 2019 के बीच बनाया गया था, ताकि 1986 में तबाह हुए रिएक्टर-4 को कम से कम 100 साल तक सुरक्षित रखा जा सके। अब खतरा यह है कि गुंबद के पूरी तरह सील न रहने से भविष्य में नमी, जंग या रेडियोएक्टिव धूल बाहर निकलने का जोखिम बढ़ सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अभी कोई तात्कालिक खतरा नहीं है, लेकिन अगर हालात यूं ही रहे तो लंबे समय में परेशानी बढ़ सकती है।

इस मामले में दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। यूक्रेन का कहना है कि रूस ने जानबूझकर न्यूक्लियर साइट को निशाना बनाया, जबकि रूस इन आरोपों को सिरे से खारिज कर रहा है। IAEA फिलहाल तटस्थ रुख अपनाए हुए है, लेकिन वह लगातार चेतावनी दे रहा है कि युद्ध के बीच न्यूक्लियर साइट्स की सुरक्षा बेहद संवेदनशील मुद्दा है।

1986 की चेरनोबिल त्रासदी ने पहले ही दुनिया को भारी कीमत चुकाने पर मजबूर किया था। ताजा घटनाक्रम यह याद दिलाता है कि जंग के दौर में न्यूक्लियर सुरक्षा से जुड़ा एक छोटा सा खतरा भी वैश्विक संकट में बदल सकता है। विशेषज्ञों की राय साफ है—चेरनोबिल की स्थायी सुरक्षा का असली रास्ता मरम्मत से ज्यादा, शांति से होकर गुजरता है।

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TAGGED: Chernobyl, Drone Attack, geopolitics, Global Security, IAEA Warning, New Safe Confinement, Nuclear Disaster, Nuclear Safety, Nuclear Shield, Radiation Risk, Russia Ukraine War, Russian Drones, Ukraine Conflict, world news
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