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दक्षिण एशिया का भविष्‍य किसके हाथ ? जानें पाकिस्तान–बांग्लादेश–चीन का नया त्रिकोण क्या संकेत देता है?

news desk
Last updated: December 11, 2025 12:27 pm
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दक्षिण एशिया का नया त्रिकोण पाकिस्तान–बांग्लादेश–चीन
दक्षिण एशिया का नया त्रिकोण पाकिस्तान–बांग्लादेश–चीन
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दक्षिण एशिया की राजनीति एक बार फिर गरम है। पाकिस्तान के डिप्टी PM और विदेश मंत्री इशाक डार पिछले हफ्ते एक नया आइडिया लेकर आए—पाकिस्तान, बांग्लादेश और चीन मिलकर अब एक “लचीले मॉडल” वाला नया रीजनल ग्रुप बना सकते हैं। नाम भले नया न हो, लेकिन इशारा साफ है: एक ऐसा SAARC जिसमें भारत नहीं होगा।

Contents
SAARC ठप पड़ा है, और पाकिस्तान इस खाली जगह को भरने की कोशिश मेंभारत का नजरियाबांग्लादेश का झुकाव बदल रहा है, और यह भारत के लिए चिंता का विषयBIMSTEC और मजबूत पड़ोसी नीतियह नया ‘भारत विहीन SAARC’ शायद कागज पर ही रह जाएगा

डार ने इस मॉडल को ‘वैरिएबल जियोमेट्री’ कहा—मतलब जिस मुद्दे पर सहमति हो, उस पर साथ आओ; पूरी सहमति की कोई जरूरत नहीं। टेक्नोलॉजी, कनेक्टिविटी, अर्थव्यवस्था जैसे सेक्टरों में देश अपनी-अपनी सहूलियत के हिसाब से पार्टनर बन सकते हैं। दिलचस्प यह है कि पाकिस्तान इस पहल को आगे बढ़ाकर नेपाल, श्रीलंका, भूटान और मालदीव जैसे देशों को भी जोड़ने की बात कर रहा है।

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती।

SAARC ठप पड़ा है, और पाकिस्तान इस खाली जगह को भरने की कोशिश में

SAARC की 2014 के बाद कोई बैठक नहीं हुई। भारत–पाकिस्तान तनाव और सीमा-पार आतंकवाद की वजह से संगठन लगभक बेकार हो चुका है। भारत ने 2016 का इस्लामाबाद समिट भी बायकॉट कर दिया था।

इसी बीच पाकिस्तान को मौका मिला—एक नया प्लान, एक नया गठजोड़, और एक नई रणनीति, जिसमें चीन एक बड़े भाई की तरह साथ खड़ा है।

भारत का नजरिया

भारतीय विदेश नीति साफ कहती है—नेबर फर्स्ट । यही वजह है कि इस नए “बिना भारत वाले SAARC” को भारत एक तरह की राजनीतिक साजिश मान रहा है। पाकिस्तान पहले भी भारत के प्रभाव को चुनौती देता रहा है, लेकिन इस बार चीन की एंट्री ने मामला बड़ा कर दिया है।

क्योंकि चीन पहले ही पाकिस्तान को CPEC के जरिए गहरे कर्ज में डुबो चुका है, और बांग्लादेश भी BRI प्रोजेक्ट्स में उलझा हुआ है। ऐसे में अगर नेपाल, भूटान या मालदीव भी इस छोटे SAARC-जैसे ग्रुप में जाते हैं, तो भारत की क्षेत्रीय रणनीति को झटका लग सकता है।

लेकिन विशेषज्ञ साफ कहते हैं—ये मॉडल ज्यादा चलने वाला नहीं है, क्योंकि दक्षिण एशिया की ज्यादातर अर्थव्यवस्थाएं भारत पर ही निर्भर हैं। आयात–निर्यात, दवाइयां, संकट में मदद… सबके लिए भारत ही फर्स्ट रिस्पॉन्डर है।

बांग्लादेश का झुकाव बदल रहा है, और यह भारत के लिए चिंता का विषय

सबसे बड़ा ट्विस्ट बांग्लादेश है। 2023 में हुए तख्तापलट के बाद से देश की राजनीति बिलकुल बदल चुकी है। पूर्व PM शेख हसीना आज भारत में शरण लेकर रह रहीं हैं, जबकि ढाका में अब मोहम्मद यूनुस और कट्टरपंथी समूहों का प्रभाव बढ़ रहा है।

नई सरकार पाकिस्तान और चीन के साथ ज्यादा सहज दिख रही है. बांग्लादेश की सरकारी एजेंसी ने भी साफ लिखा है कि “बांग्लादेश पाकिस्तान के साथ जा सकता है।” हालांकि उसने यह भी माना कि नेपाल और भूटान जैसे देश भारत को छोड़कर पाकिस्तान–चीन कैंप में जाना मुश्किल मानेंगे।

पाकिस्तानी विदेश मंत्री डार का हालिया बयान कि “पार्टनरशिप में और देशों को जोड़ा जा सकता है” और बांग्लादेश की प्रतिक्रिया बताती है कि दोनों देश मिलकर एक नया रीजनल ग्रुप खड़ा करने की कोशिश में हैं.

BIMSTEC और मजबूत पड़ोसी नीति

भारत पहले ही SAARC के विकल्प के रूप में BIMSTEC को मजबूत कर चुका है, जिसमें पाकिस्तान शामिल नहीं है। भारत–नेपाल जल समझौते, भूटान के साथ हाइड्रो प्रोजेक्ट्स, मालदीव के साथ डेवलपमेंट पार्टनरशिप—ये सब भारत की बढ़ती पकड़ को दिखाते हैं।

क्वाड और इंडो-पैसिफिक रणनीति भी भारत को एक बड़े स्तर पर लीडरशिप देती है, जो चीन–पाकिस्तान की राजनीति को सीमित करती है।

यह नया ‘भारत विहीन SAARC’ शायद कागज पर ही रह जाएगा

विशेषज्ञ मानते हैं कि इशाक डार का यह प्लान ज्यादा दिन नहीं टिकेगा. क्योंकि भारत के बिना क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था टिक नहीं सकती. रक्षा, राजनीति और ट्रेड—हर मोर्चे पर भारत की बढ़त बहुत ज्यादा है. ज्यादातर दक्षिण एशियाई देश भारत से टकराव मोल नहीं लेंगे

अंत में, दक्षिण एशिया का कोई भी ढांचा तभी सफल होगा जब भारत उसमें शामिल हो. नहीं तो यह सिर्फ एक और राजनीतिक स्टंट बनकर रह जाएगा.जैसे SAARC आज खुद को साबित करने में संघर्ष कर रहा है.

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TAGGED: Bangladesh coup politics, Bangladesh political shift, China influence Asia, India foreign policy, Pakistan China relations, Pakistan diplomacy, Regional alliance, SAARC crisis, South Asia geopolitics
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