देश में 93,000 सरकारी स्कूलों पर लटका ताला
भारत में सरकारी स्कूली शिक्षा के बुनियादी ढांचे को लेकर एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है जिसने पॉलिसी मेकर्स और आम जनता को सोचने पर मजबूर कर दिया है। संसद के मौजूदा सत्र में पेश किए गए सरकारी आंकड़े बताते हैं कि पिछले 10 वर्षों से यानि 2014-15 से 2024-25 के अन्दर देश भर में 93,000 हज़ार से ज्यादा सरकारी स्कूल या तो बंद कर दिए गए हैं या उन्हें दूसरे स्कूलों में मर्ज कर दिया गया है।
कहा है सबसे ज्यादा ‘एजुकेशन क्राइसिस’
रिपोर्ट के मुताबिक, स्कूलों के बंद होने का सबसे भयावह असर दो बड़े राज्यों में देखा गया है:
उत्तर प्रदेश: यहाँ रिकॉर्ड 24,590 हज़ार स्कूल बंद हुए।
मध्य प्रदेश: यहाँ 22,438 स्कूलों के अस्तित्व पर असर पड़ा। इनके अलावा ओडिशा, झारखंड और राजस्थान जैसे राज्यों में भी शिक्षा के इस बदलते ढांचे ने हजारों स्कूलों को प्रभावित किया है।
प्राइवेट स्कूलों का बढ़ता ‘दबदबा’
एक तरफ जहाँ सरकारी स्कूलों की संख्या में 8% की गिरावट दर्ज की गई है, वहीं दूसरी ओर Private स्कूलों का बाजार तेजी से बढ़ा है। आंकड़ों के अनुसार, इसी 10 साल के पीरियड में प्राइवेट स्कूलों की संख्या में 14.9% का इजाफा हुआ है। यह ट्रेंड इशारा करता है कि ग्रामीण और गरीब बच्चे भी अब धीरे-धीरे प्राइवेट संस्थानों की ओर जाने को मजबूर हैं।
सरकारी डेटा इस गिरावट को दो चरणों में बांटता है:
एक्सपर्ट्स की चेतावनी:
शिक्षा जगत के जानकारों का मानना है कि दूर-दराज के स्कूलों को मर्ज करने से ‘स्कूल-ड्रॉपआउट’ रेट बढ़ सकता है। खासकर ग्रामीण इलाकों की लड़कियों के लिए घर से दूर के स्कूल जाना सुरक्षा और दूरी के लिहाज से चुनौतीपूर्ण होगा। साथ ही, निजी स्कूलों की बढ़ती फीस गरीब परिवारों की जेब पर भारी पड़ रही है।
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