राज्यसभा को संसद का उच्च सदन कहा जाता है और यहां पहुंचने वाले सांसद देश की राजनीति के साथ-साथ अलग-अलग क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में राज्यसभा की सदस्यता की आर्थिक प्रोफाइल भी चर्चा का विषय बनी है।
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स यानी ADR की जून 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, 226 मौजूदा राज्यसभा सांसदों के चुनावी हलफनामों का विश्लेषण किया गया। इनमें 31 सांसदों यानी करीब 14 फीसदी ने ₹100 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति घोषित की है। यानी विश्लेषण किए गए सांसदों में लगभग हर सातवां सांसद इस श्रेणी में आता है।
ADR के अलग-अलग वर्षों के आंकड़ों को देखें तो ₹100 करोड़ से ज्यादा संपत्ति घोषित करने वाले राज्यसभा सांसदों की संख्या में बड़ा बदलाव दिखाई देता है।
2018 की ADR रिपोर्ट में 229 सांसदों में औसत घोषित संपत्ति ₹55.62 करोड़ थी। वहीं 2024 की रिपोर्ट में 225 सांसदों में 31 सांसदों ने ₹100 करोड़ से ज्यादा संपत्ति घोषित की थी। 2026 की जून रिपोर्ट में भी 226 सांसदों के विश्लेषण में यह संख्या 31 रही।
इस तुलना से एक बात साफ है कि राज्यसभा के मौजूदा सदस्यों के बीच बहुत ज्यादा संपत्ति वाले सांसदों की मौजूदगी एक महत्वपूर्ण पैटर्न बन चुकी है।
ADR के मुताबिक, जून 2026 में विश्लेषण किए गए 226 राज्यसभा सांसदों की कुल घोषित संपत्ति करीब ₹26,047 करोड़ है।
इन सांसदों की औसत घोषित संपत्ति ₹115.25 करोड़ बैठती है। हालांकि औसत पर बहुत अधिक संपत्ति वाले कुछ सांसदों का प्रभाव पड़ता है, इसलिए इसे हर सांसद की सामान्य संपत्ति का प्रतिनिधि आंकड़ा नहीं माना जा सकता।
ADR की रिपोर्ट में तेलंगाना से BRS सांसद बंदी पार्थ सारधी रेड्डी सबसे ज्यादा घोषित संपत्ति वाले सांसद हैं। उनकी संपत्ति ₹5,300 करोड़ से ज्यादा बताई गई है।
इसके बाद पंजाब से BJP के राजिंदर गुप्ता की घोषित संपत्ति ₹5,053 करोड़ से अधिक है। तीसरे स्थान पर कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी हैं, जिनकी घोषित संपत्ति करीब ₹2,558 करोड़ बताई गई है।
इसके अलावा समाजवादी पार्टी की सांसद जया बच्चन भी ₹1,500 करोड़ से अधिक घोषित संपत्ति वाले सांसदों में शामिल हैं। ADR के आंकड़ों में उनकी संपत्ति करीब ₹1,578 करोड़ बताई गई है।
ADR के 2026 के विश्लेषण में BJP के 107 सांसदों में 7 यानी करीब 7 फीसदी ने ₹100 करोड़ से अधिक संपत्ति घोषित की।
कांग्रेस के 29 सांसदों में 6 यानी करीब 21 फीसदी सांसद इस श्रेणी में हैं।
YSRCP के 4 में 2, TDP के 4 में 2, BRS के 3 में 2 और NCP के 4 में 2 सांसदों ने ₹100 करोड़ से ज्यादा संपत्ति घोषित की है।
इन आंकड़ों को पार्टी के सभी सांसदों की आर्थिक स्थिति का प्रतिनिधि मानने के बजाय सिर्फ उपलब्ध चुनावी हलफनामों में घोषित संपत्ति के आधार पर देखना चाहिए।
राज्यवार आंकड़ों में भी बड़ा अंतर दिखाई देता है।
तेलंगाना के 7 में से 4 सांसद यानी 57 फीसदी ने ₹100 करोड़ से ज्यादा संपत्ति घोषित की है। आंध्र प्रदेश में 11 में से 5 यानी करीब 45 फीसदी सांसद इस श्रेणी में हैं।
ओडिशा में 10 में से 3 और पंजाब में 7 में से 2 सांसदों ने ₹100 करोड़ से ज्यादा संपत्ति घोषित की है।
उत्तर प्रदेश में 31 में से 4 सांसद यानी करीब 13 फीसदी इस श्रेणी में आते हैं। महाराष्ट्र में यह संख्या 19 में से 3 और तमिलनाडु में 18 में से 2 है।
ADR के मुताबिक, 226 विश्लेषित सांसदों की कुल घोषित संपत्ति ₹26,047 करोड़ है।
खास बात यह है कि तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के 18 सांसदों की कुल घोषित संपत्ति करीब ₹10,259 करोड़ है। यानी इन दोनों राज्यों के सांसदों की घोषित संपत्ति अकेले कुल संपत्ति का करीब 39 फीसदी बैठती है।
इन आंकड़ों से यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि राज्यसभा तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता आर्थिक ताकत है। सांसद अलग-अलग राजनीतिक, कारोबारी, पेशेवर और पारिवारिक पृष्ठभूमि से आते हैं।
लेकिन चुनावी हलफनामों के आंकड़े यह जरूर दिखाते हैं कि राज्यसभा की मौजूदा सदस्यता में बेहद अधिक संपत्ति वाले सांसदों की संख्या और आर्थिक हिस्सेदारी उल्लेखनीय है।
और यही सवाल राज्यसभा की बदलती सामाजिक और आर्थिक प्रोफाइल पर चर्चा को जन्म देता है—क्या उच्च सदन में अब राजनीतिक प्रतिनिधित्व के साथ-साथ आर्थिक विविधता पर भी ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है?
कान में ईयरबड्स लगाते ही दर्द या चुभन होने लगती है? या फिर लंबे समय…
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर शुक्रवार, 2 अक्टूबर को…
भारत के युवा पहलवान सुजीत कलकल ने एशियन गेम्स 2026 में ऐसा प्रदर्शन किया, जिसे…
अजय देवगन की सबसे सस्पेंसफुल और मोस्ट अवेटेड फ्रेंचाइजी फिल्म 'दृश्यम 3: द कन्क्लूजन' आखिरकार…
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों पर होने वाला चुनाव अब सिर्फ सीटों के…
जापान के आइची-नागोया में चल रहे एशियन गेम्स में 2 अक्टूबर का दिन भारत के…