भारत के युवा पहलवान सुजीत कलकल ने एशियन गेम्स 2026 में ऐसा प्रदर्शन किया, जिसे लंबे समय तक याद किया जाएगा। पुरुषों की 65 किलोग्राम फ्रीस्टाइल कुश्ती के फाइनल में एक समय सुजीत 9-2 से पीछे थे, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
मैच के आखिरी दौर में सुजीत ने लगातार अंक जुटाकर मुकाबले को 9-8 तक पहुंचा दिया। इसके बाद जब जीत के लिए सिर्फ कुछ सेकंड बचे थे, उन्होंने एक आखिरी अटैक किया और ताजिकिस्तान के पहलवान को मैट पर गिराकर 2 अंक हासिल कर लिए।
इसी के साथ स्कोर पलटा और सुजीत ने 11-9 से मुकाबला अपने नाम करते हुए गोल्ड मेडल जीत लिया।
सुजीत कलकल के लिए यह पहला एशियन गेम्स था। 65 किलो वर्ग में उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया और अपने डेब्यू को गोल्ड मेडल में बदल दिया।
इस कैटेगरी में इससे पहले बजरंग पुनिया भारत के बड़े नाम रहे हैं। ऐसे में सुजीत के प्रदर्शन को भारतीय कुश्ती में अगली पीढ़ी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
लेकिन सुजीत ने सिर्फ नाम की वजह से नहीं, बल्कि मैट पर अपने प्रदर्शन से अपनी पहचान बनाई।
सुजीत का सफर फाइनल तक भी आसान नहीं था। शुरुआती दौर में उन्होंने शानदार जीत हासिल कर सेमीफाइनल में जगह बनाई।
यहां उनके सामने जापान के स्टार पहलवान और मौजूदा ओलंपिक चैंपियन कियूको की चुनौती थी। सुजीत ने इस मुकाबले में भी दबाव नहीं बनने दिया और जीत दर्ज कर फाइनल का टिकट हासिल किया।
इसके बाद खिताबी मुकाबले में उन्होंने 9 अंकों से पिछड़ने के बावजूद जिस तरह वापसी की, उसने उनकी मानसिक मजबूती और तकनीकी क्षमता दोनों दिखा दी।
सुजीत कलकल हरियाणा के भिवानी जिले के इमलोटा गांव से आते हैं। कुश्ती से उनका रिश्ता बचपन से ही रहा है।
उनके पिता खुद राष्ट्रीय स्तर के पहलवान रहे हैं और उन्होंने ही गांव के अखाड़े में सुजीत को कुश्ती के शुरुआती दांव-पेच सिखाए।
बचपन में पिता से मिले शुरुआती प्रशिक्षण के बाद सुजीत ने अलग-अलग कोचों के मार्गदर्शन में अपनी तकनीक और खेल को लगातार बेहतर किया।
एशियन गेम्स के फाइनल में उनकी वापसी में वही आक्रामकता और तकनीक देखने को मिली, जो उन्होंने वर्षों के अभ्यास से हासिल की है।
सुजीत की यह सफलता अचानक नहीं आई है। एशियन गेम्स 2026 से कुछ महीने पहले ही उन्होंने एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता था।
इसके अलावा वह अंडर-23 और अंडर-20 स्तर पर भी एशियन चैंपियनशिप का खिताब जीत चुके हैं।
अब सीनियर स्तर पर एशियन गेम्स गोल्ड ने उनके अंतरराष्ट्रीय करियर में एक और बड़ी उपलब्धि जोड़ दी है।
9-2 से पिछड़ना, फिर 9-8 तक वापसी और आखिरी 15 सेकंड में 2 अंक लेकर गोल्ड जीतना—सुजीत कलकल ने एशियन गेम्स 2026 में सिर्फ मेडल नहीं जीता, बल्कि एक यादगार कमबैक की कहानी भी लिख दी।
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