उत्तर प्रदेश की सियासत में ‘मिशन 2027’ को लेकर बिगुल बज चुका है और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की मुखिया मायावती के एक हुंकार ने राजधानी लखनऊ के राजनीतिक तापमान को अचानक बढ़ा दिया है। दरअसल,आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों को धार देने और विरोधियों की नींद उड़ाने के मकसद से मायावती ने लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय में 75 जिलों के आला पदाधिकारियों के साथ एक हाई-वोल्टेज समीक्षा बैठक की। इसी बैठक में एक ऐसा बड़ा ऐलान किया गया जिसने पूरे प्रदेश के राजनीतिक हलकों में खलबली मचा दी है। बसपा अब आने वाले 6 दिसंबर 2026 को लखनऊ के आंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल पर एक ऐसी ‘महारैली‘ करने जा रही है, जो मायावती के दावों के मुताबिक भीड़ के सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ देगी और न सिर्फ रैली स्थल, बल्कि पूरा लखनऊ समर्थकों से पट जाएगा।
6 दिसंबर को महापरिनिर्वाण दिवस पर सबसे बड़ा शक्ति प्रदर्शन
डॉ. भीमराव आंबेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस के मौके पर बुलाई गई यह महारैली केवल एक श्रद्धांजलि सभा नहीं होगी, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले बसपा का अब तक का सबसे बड़ा सियासी शक्ति प्रदर्शन बनने जा रही है।
मायावती ने पार्टी के नेताओं को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि इस महारैली को ऐतिहासिक बनाना है और इसके लिए अगले एक महीने के भीतर प्रदेश के कोने-कोने से कार्यकर्ताओं और समर्थकों की अभूतपूर्व मौजूदगी सुनिश्चित की जाए।
75 जिलों के अध्यक्ष और मंडल प्रभारी बैठक में हुए शामिल
लखनऊ के मॉल एवेन्यू स्थित बसपा कार्यालय में हुई इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की अध्यक्षता खुद मायावती ने की। इसमें:
- प्रदेश स्तर के सभी वरिष्ठ पदाधिकारी
- सभी मंडलों के प्रभारी (कोऑर्डिनेटर्स)
- भाईचारा समितियों के प्रमुख
उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों के जिलाध्यक्ष शामिल हुए। बैठक में मायावती ने सीधे तौर पर ज़मीनी हकीकत का फीडबैक लिया और संगठन को सीधे बूथ स्तर पर मजबूत करने के कड़े निर्देश दिए।
बूथ मजबूती और सर्वसमाज को जोड़ने की विशेष रणनीति
बैठक का मुख्य फोकस संगठन को सबसे निचली इकाई यानी ‘बूथ स्तर’ तक पूरी तरह सक्रिय करना रहा। मायावती ने खास तौर पर निर्देश दिए कि गरीब, शोषित और कमजोर वर्गों के साथ-साथ ‘सर्वसमाज’ के लोगों को बसपा की विचारधारा से जोड़ा जाए। इसके लिए भाईचारा समितियों को विशेष जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, ताकि हर वर्ग के मतदाता तक बसपा अपनी पहुंच बना सके।
संभावित उम्मीदवारों के चयन पर लिया गया फीडबैक
बैठक में आगामी विधानसभा चुनाव के संभावित प्रत्याशियों के चयन को लेकर भी जिलाध्यक्षों और मंडल प्रभारियों से विस्तार से बातचीत हुई। क्षेत्रवार राजनीतिक और संगठनात्मक स्थिति का बारीकी से आकलन किया गया। मिले फीडबैक के आधार पर अब आगे के चुनावी कार्यक्रमों और रणनीतियों को लेकर पदाधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंप दी गई हैं।
बसपा सुप्रीमो के इस आक्रामक रुख और 6 दिसंबर की ‘महारैली’ के ऐलान से यह साफ हो गया है कि बसपा आने वाले चुनावों में पूरे दमखम के साथ उतरने के लिए अपनी रणनीति तैयार कर चुकी है।