वॉशिंगटन/तेहरान। मिडिल-ईस्ट के समुद्र में इस वक्त बारूद की गंध से ज्यादा तेल के संकट की चर्चा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ एक ऐसा ‘साइलेंट वेपन’ (शांत हथियार) इस्तेमाल किया है, जिसने तेहरान को कूटनीतिक गलियारों के बजाय अपने ही तेल के कुओं पर रक्षात्मक होने को मजबूर कर दिया है।
इसे ‘लिक्विड लॉक’ की स्थिति कहा जा रहा है, जहाँ दुनिया तेल की कमी से जूझ रही है, वहीं ईरान अपने ही तेल के बोझ तले दब रहा है।
दशकों बाद यह पहला मौका है जब अमेरिका ने अपनी नौसेना की सबसे बड़ी ताकत—तीन एयरक्राफ्ट कैरियर (USS अब्राहम लिंकन, USS जेराल्ड आर. फोर्ड और USS जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश)—को एक साथ तैनात किया है।
आमतौर पर तेल किसी भी देश के लिए संपत्ति होता है, लेकिन ट्रंप की नाकेबंदी ने इसे ईरान के लिए ‘लायबिलिटी’ (बोझ) बना दिया है।
ईरान अब तक पहचान छिपाकर (Shadow Trade) चीन और अन्य देशों को तेल बेचता था, लेकिन समुद्र, सैटेलाइट और रडार के इस त्रिस्तरीय घेरे ने इन चोर रास्तों को भी बंद कर दिया है। अब ईरान के पास केवल दो ही रास्ते बचे हैं:
यह ईरान के लिए एक नई तरह की जंग है। अब तक लड़ाई यूरेनियम और मिसाइलों की थी, लेकिन अब लड़ाई अपने अस्तित्व और मुख्य आय के स्रोत (तेल) को बचाने की है। ट्रंप की यह ‘नाकेबंदी’ बिना एक भी मिसाइल दागे ईरान की रीढ़ तोड़ने की ताकत रखती है।
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