वॉशिंगटन/तेहरान। मिडिल-ईस्ट के समुद्र में इस वक्त बारूद की गंध से ज्यादा तेल के संकट की चर्चा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ एक ऐसा ‘साइलेंट वेपन’ (शांत हथियार) इस्तेमाल किया है, जिसने तेहरान को कूटनीतिक गलियारों के बजाय अपने ही तेल के कुओं पर रक्षात्मक होने को मजबूर कर दिया है।
इसे ‘लिक्विड लॉक’ की स्थिति कहा जा रहा है, जहाँ दुनिया तेल की कमी से जूझ रही है, वहीं ईरान अपने ही तेल के बोझ तले दब रहा है।
1. होर्मुज की घेराबंदी: तीन ‘फ्लोटिंग सिटीज’ का पहरा
दशकों बाद यह पहला मौका है जब अमेरिका ने अपनी नौसेना की सबसे बड़ी ताकत—तीन एयरक्राफ्ट कैरियर (USS अब्राहम लिंकन, USS जेराल्ड आर. फोर्ड और USS जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश)—को एक साथ तैनात किया है।
- नतीजा: ईरानी बंदरगाहों की ओर जाने वाले हर जहाज पर 200 से अधिक लड़ाकू विमानों की नजर है। अब तक 34 से ज्यादा टैंकरों को वापस लौटने पर मजबूर किया गया है।
- इम्पैक्ट: ईरान का 90% तेल निर्यात करने वाला ‘खर्ग आइलैंड’ अब एक टापू मात्र बनकर रह गया है।
2. ‘ब्लैक गोल्ड’ बना ईरान का सिरदर्द
आमतौर पर तेल किसी भी देश के लिए संपत्ति होता है, लेकिन ट्रंप की नाकेबंदी ने इसे ईरान के लिए ‘लायबिलिटी’ (बोझ) बना दिया है।
- स्टोरेज फुल: ईरान के जमीनी टैंक भर चुके हैं। अब वह समुद्र में खड़े पुराने टैंकरों (Floating Storage) का सहारा ले रहा है, लेकिन यह समाधान भी दो-तीन दिन से ज्यादा नहीं खिंच पाएगा।
- कुओं की ‘मौत’ का डर: यदि भंडारण की जगह नहीं मिली, तो ईरान को अपने तेल के कुएं बंद (Shut-in) करने होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि एक बार कुआं बंद होने पर उसका प्रेशर खत्म हो जाता है, जिससे वह भविष्य में दोबारा चालू होने लायक नहीं रह सकता। यह ईरान की अर्थव्यवस्था के लिए ‘परमानेंट डैमेज’ होगा।
3. ‘शैडो ट्रेड’ पर अमेरिका की सर्जिकल स्ट्राइक
ईरान अब तक पहचान छिपाकर (Shadow Trade) चीन और अन्य देशों को तेल बेचता था, लेकिन समुद्र, सैटेलाइट और रडार के इस त्रिस्तरीय घेरे ने इन चोर रास्तों को भी बंद कर दिया है। अब ईरान के पास केवल दो ही रास्ते बचे हैं:
- अपनी आने वाली पीढ़ियों के संसाधन (तेल कुएं) को हमेशा के लिए खो दे।
- या फिर अपनी मिसाइल और न्यूक्लियर जिद छोड़कर बातचीत की मेज पर आए।
विश्लेषण: यह न्यूक्लियर नहीं, ‘अस्तित्व’ की जंग है
यह ईरान के लिए एक नई तरह की जंग है। अब तक लड़ाई यूरेनियम और मिसाइलों की थी, लेकिन अब लड़ाई अपने अस्तित्व और मुख्य आय के स्रोत (तेल) को बचाने की है। ट्रंप की यह ‘नाकेबंदी’ बिना एक भी मिसाइल दागे ईरान की रीढ़ तोड़ने की ताकत रखती है।