नई दिल्ली। भारतीय राजनीति के गलियारों में शुक्रवार को उस वक्त भूचाल आ गया जब आम आदमी पार्टी (AAP) के सबसे भरोसेमंद चेहरे माने जाने वाले राघव चड्ढा और संदीप पाठक ने भाजपा में शामिल होने का औपचारिक ऐलान कर दिया। यह केवल व्यक्तिगत दलबदल नहीं, बल्कि राज्यसभा में ‘आप’ के अस्तित्व पर एक बड़ा प्रहार है, क्योंकि पार्टी के 10 में से 7 सांसदों ने एक साथ पाला बदलने का फैसला किया है।
राघव चड्ढा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस ‘महा-विलय’ की कानूनी रणनीति का खुलासा किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि संविधान की 10वीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) के तहत, यदि किसी दल के दो-तिहाई सदस्य एक साथ किसी अन्य दल में मिलते हैं, तो उनकी सदस्यता रद्द नहीं होती। चड्ढा के साथ इस फेहरिस्त में हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, विक्रम साहनी, अशोक मित्तल और राजेंद्र गुप्ता जैसे बड़े नाम शामिल हैं।
इस फूट पर विपक्षी खेमे, विशेषकर कांग्रेस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए इसे भाजपा की पुरानी रणनीति का हिस्सा बताया।
” जयराम रमेश, कांग्रेस महासचिव ने कहा बीजेपी की वॉशिंग मशीन और ‘मोदी वॉशिंग पाउडर’ फिर से सक्रिय हो गए हैं। जो लोग खुद को सदाचार और विचारधारा का सबसे बड़ा आदर्श बताते थे, वे आज सत्ता के लालच में पूरी तरह बेनकाब हो चुके हैं।”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व के लिए अब तक का सबसे बड़ा झटका है।’ईमानदारी की राजनीति’ का दावा करने वाली पार्टी के वरिष्ठ रणनीतिकारों (संदीप पाठक और राघव चड्ढा) का जाना पार्टी की आंतरिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। इस विलय के बाद उच्च सदन में भाजपा की स्थिति और मजबूत होगी, जबकि आम आदमी पार्टी की आवाज कमजोर पड़ना तय है।
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