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कंक्रीट के जंगलों में अब नहीं घुटेगा दम! आ गया इंडिया का पहला मोबाइल ‘Liquid Tree’, बिना पेड़ के मिलेगी प्योर ऑक्सीजन

बड़े शहरों में बढ़ता एयर पॉल्यूशन अब एक ऐसा साइलेंट किलर बन चुका है, जो सीधे हमारी और हमारी आने वाली जनरेशन की सांसों पर वार कर रहा है। दिल्ली-एनसीआर से लेकर बड़े इंडस्ट्रियल हब्स तक, एयर क्वालिटी इंडेक्स “AQI” का ग्राफ लगातार डराने वाले लेवल पर रहता है। इस दमघोंटू माहौल के बीच वैज्ञानिकों ने एक ऐसा कूल और सुपर-एडवांस्ड सॉल्यूशन खोज निकाला है, जो उन जगहों पर भी प्योर ऑक्सीजन डिलीवर करेगा जहां पेड़ लगाना नेक्स्ट टू इम्पॉसिबल है।

सीएसआईआर-सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ माइनिंग एंड फ्यूल रिसर्च (CSIR-CIMFR) के वैज्ञानिकों ने इंडिया का पहला मोबाइल लिक्विड ट्री डेवलप किया है। इस अत्याधुनिक और इनोवेटिव टेक्नोलॉजी को SALT यानी ‘स्मार्ट एल्गल लिक्विड ट्री’ नाम दिया गया है।

क्या है यह ‘SALT’ टेक्नोलॉजी और कैसे करती है काम?

सिंपल वर्ड्स में कहें तो SALT एक पोर्टेबल और स्मार्ट एयर प्यूरीफिकेशन सिस्टम है, जो हुबहू एक रियल पेड़ की तरह ही फंक्शन करता है। यह पूरा सिस्टम पूरी तरह से नेचर-इन्सपायर्ड है:

बायोलॉजिकल एयर फिल्टर: इस डिवाइस के क्लोज्ड कंटेनर के अंदर पानी और बेहद छोटे ‘माइ्रोएल्गी’ का इस्तेमाल किया जाता है।

कार्बन सोखने की क्षमता: जैसे ही पॉल्यूटेड एयर इस सिस्टम के कॉन्टैक्ट में आती है, इसमें मौजूद माइक्रोएल्गी हवा से टॉक्सिक कार्बन डाइऑक्साइड co2 को एब्जॉर्ब कर लेती है।

नेचुरल ऑक्सीजन जनरेटर: इसके बाद, यह सिस्टम नेचुरल फोटोसिंथेसिस की प्रोसेस को रेप्लिकेट करता है और हवा में भारी मात्रा में प्योर ऑक्सीजन (O2) रिलीज करता है।

स्मार्ट एनर्जी सपोर्ट: यह पूरा सिस्टम मेनली सोलर एनर्जी यानी सूरज की रोशनी पर ऑपरेट होता है। हालांकि, इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि धूप न होने पर यह आर्टिफिशियल लाइट की मदद से भी उतनी ही एफिशिएंसी से काम कर सकता है।

जहां पॉल्यूशन, वहां सॉल्यूशन

इस तकनीक की सबसे बड़ी USP इसकी मोबिलिटी यानी पोर्टेबिलिटी है। यह एक कॉम्पैक्ट और मोबाइल स्ट्रक्चर है, जिसे आसानी से एक जगह से उठाकर दूसरी जगह शिफ्ट किया जा सकता है। भारी-भरकम और फिक्स्ड एयर प्यूरीफायर के मुकाबले इसे कहीं भी मूव करना बेहद आसान है।

शुरुआती फेज में इस प्रोजेक्ट को झारखंड के धनबाद स्थित CSIR-CIMFR परिसर और मध्य प्रदेश के सिंगरौली में नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (NCL) के कैंपस में इंस्टॉल किया गया है, जहां इसके रिजल्ट्स काफी प्रॉमिसिंग रहे हैं।

क्या यह असली पेड़ों की जगह ले सकता है?

वैज्ञानिकों ने साफ कर दिया है कि SALT टेक्नोलॉजी को असली पेड़ों के रिप्लेसमेंट के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। यह उन कंक्रीट के जंगलों, मेट्रो स्टेशन्स, हैवी ट्रैफिक सिग्नल्स और संकरी गलियों के लिए एक गेम-चेंजर लाइफ-सपोर्ट सिस्टम है, जहां स्पेस क्रंच के कारण पौधे या पेड़ लगाना बिल्कुल भी पॉसिबल नहीं है।

फ्यूचर के स्मार्ट शहरों और हाई-पॉल्यूशन ज़ोन के लिए यह लिक्विड ट्री आने वाले टाइम में एक बड़ा वरदान साबित हो सकता है, जो बिना जमीन घेरे अर्बन पापुलेशन को खुलकर सांस लेने की आजादी देगा।

news desk

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