आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की रेस अब सिर्फ बिजनेस तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह सुपरपावर्स के लिए सबसे बड़ा ‘नेशनल एसेट’ बन चुकी है। अमेरिका के बाद अब चीन ने भी अपनी एडवांस्ड AI टेक्नोलॉजी पर पूरी तरह से कंट्रोल कसने का मन बना लिया है। एक सीक्रेट रिपोर्ट के मुताबिक, चीनी सरकार ने देश की टॉप टेक कंपनियों को कड़ी चेतावनी देते हुए साफ कर दिया है कि अगर उनका एडवांस्ड AI डेटा या मॉडल देश से बाहर लीक हुआ, तो इसे सीधे नेशनल सिक्योरिटी के खिलाफ अपराध माना जाएगा।
बीजिंग में चीनी कॉमर्स मिनिस्टर और नेशनल डेवलपमेंट एंड रिफॉर्म कमीशन (NDRC) के अधिकारियों ने देश के टेक दिग्गजों के साथ कई हाई-लेवल बैठकें की हैं। इस सीक्रेट मीटिंग में अलीबाबा (Alibaba), बाइटडांस (ByteDance), और तेजी से उभरते हुए AI स्टार्टअप Z.ai के टॉप एग्जीक्यूटिव्स शामिल थे। सरकार का पूरा फोकस इस बात पर है कि चीन की अगली पीढ़ी के सबसे एडवांस्ड AI मॉडल्स तक किसी भी विदेशी यूजर या कंपनी की पहुंच को पूरी तरह ब्लॉक या सीमित किया जा सके।
Alibaba Qwen & ByteDance Doubao: ये चीन में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले AI इकोसिस्टम हैं।
Z.ai GLM-5.2: इस मॉडल ने अपनी बेजोड़ परफॉर्मेंस और बेहद कम लागत के दम पर सिलिकॉन वैली (अमेरिका) के बड़े-बड़े प्लेयर्स की नींद उड़ा रखी है।
चीनी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंध सिर्फ क्लोज्ड-सोर्स मॉडल्स पर नहीं, बल्कि “ओपन-वेट” वर्शन्स पर भी लागू हो सकते हैं, जिन्हें आमतौर पर डेवलपर्स कस्टमाइज और डाउनलोड कर लेते हैं। इतना ही नहीं, सरकार नई गाइडलाइंस लाने की तैयारी में है जिसके तहत घरेलू AI स्टार्टअप्स में आने वाली विदेशी फंडिंग को भी रेगुलेट किया जाएगा। अगर ये कड़े नियम लागू होते हैं, तो टेक कंपनियों के लिए ग्लोबल लेवल पर काम करना काफी मुश्किल हो जाएगा।
हाल ही में चीनी AI मॉडल्स स्पेशली डीपसीक – DeepSeek R1 के आने के बाद अपनी बेहद कम लागत और हाई एफिशिएंसी के कारण दुनिया भर के स्टार्टअप्स और कंपनियों की पहली पसंद बनते जा रहे हैं। अगर बीजिंग इन मॉडल्स के विदेशी एक्सेस को पूरी तरह ब्लॉक कर देता है, तो ग्लोबल मार्केट में कई टेक बिजनेसेज के लिए AI ऑपरेशंस कॉस्ट काफी ज्यादा बढ़ सकती है।
यह पूरा मामला अमेरिका और चीन के बीच चल रहे ‘AI कोल्ड वॉर’ का हिस्सा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन भी इस बात को लेकर अलर्ट है कि उनके एडवांस्ड AI मॉडल्स का इस्तेमाल चीन या रूस की मिलिट्री इंटेलिजेंस न कर पाए।
हाल ही में अमेरिकी सरकार ने एंथ्रोपिक (Anthropic) के सबसे शक्तिशाली मॉडल्स पर कड़े एक्सपोर्ट कंट्रोल लगाए थे। अब ठीक उसी अंदाज में चीन भी अपनी ‘डिजिटल बाउंड्री’ को मजबूत कर रहा है, जिससे यह साफ है कि आने वाले समय में AI तकनीक पूरी तरह से जियोपॉलिटिक्स के इशारों पर चलेगी।
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