अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे में हुई चोरी के मामले के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने वित्तीय सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने के लिए एक बेहद कड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। ट्रस्ट ने अपने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) खातों के संचालन के लिए एक विशेष तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति (Three-Member Committee) का गठन कर दिया है।
अब ट्रस्ट के बैंक खातों से किसी भी प्रकार के वित्तीय लेन-देन के लिए इन तीनों सदस्यों के संयुक्त हस्ताक्षर (Joint Signatures) होना अनिवार्य कर दिया गया है।
ट्रस्ट द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस नई व्यवस्था को तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया गया है। नई समिति में शामिल तीन प्रमुख चेहरे इस प्रकार हैं…
नया नियम: बिना इन तीनों सदस्यों की सामूहिक अनुमति और संयुक्त हस्ताक्षर के, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के खातों से एक रुपये का भी लेन-देन नहीं किया जा सकेगा।
चढ़ावा चोरी मामले के बाद ऐसी अटकलें थीं कि क्या ट्रस्ट अपना बैंक बदलने पर विचार कर रहा है? लेकिन सूत्रों ने इन सभी अफवाहों पर विराम लगा दिया है।
इस पूरे मामले की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने इस वित्तीय गड़बड़ी को लेकर विशेष जांच दल (SIT) को एक पत्र लिखा था। इस पत्र में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की भूमिका और कार्यप्रणाली का भी जिक्र किया गया था, जिसके बाद से ही वित्तीय पारदर्शिता को लेकर नई रणनीति पर काम शुरू हुआ।
इस नए कदम से राम मंदिर ट्रस्ट ने देश-विदेश के करोड़ों राम भक्तों को यह संदेश दिया है कि मंदिर के खजाने और चढ़ावे की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। तीन सदस्यीय समिति की यह नई व्यवस्था वित्तीय धोखाधड़ी की गुंजाइश को पूरी तरह खत्म कर देगी।
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