गोरखपुर में युवक को गोली मारने वाली युवती अंशिका सिंह को लेकर पुलिस जांच में एक के बाद एक चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर खुद को प्रभावशाली दिखाने वाली अंशिका दरअसल बीते कई वर्षों से ब्लैकमेलिंग और फर्जी मुकदमों के जरिए अवैध वसूली का एक संगठित खेल चला रही थी।
पुलिस के अनुसार, अंशिका सिंह के इंस्टाग्राम अकाउंट पर करीब साढ़े सात लाख फॉलोवर्स हैं। इसी सोशल मीडिया पहचान का इस्तेमाल कर वह लोगों को अपने जाल में फंसाती थी। पहले मैसेंजर के जरिए बातचीत, फिर वीडियो कॉल कर सामने वाले के वीडियो रिकॉर्ड किए जाते थे। इसके बाद दुष्कर्म, पॉक्सो एक्ट जैसे गंभीर मामलों में फंसाने की धमकी देकर लाखों रुपये की वसूली की जाती थी।
जिस युवक को अंशिका ने गोली मारी, उससे भी वह पहले 12 हजार रुपये वसूल चुकी थी और 50 हजार रुपये की और मांग कर रही थी। रकम न मिलने पर उसने गोली चला दी। इस घटना के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। अंशिका काले रंग की स्कार्पियो गाड़ी से घूमती थी, जिससे उसका रौब और प्रभाव और बढ़ जाता था।
पुलिस जांच में सामने आया है कि पिछले पांच वर्षों में अंशिका ने आम नागरिकों के साथ-साथ सीओ, दारोगा समेत करीब 165 लोगों को अपना शिकार बनाया। अयोध्या में तैनात एक सीओ सहित कम से कम 15 पुलिसकर्मी उसके जाल में फंस चुके हैं, जिन्होंने बदनामी और कार्रवाई के डर से लेनदेन कर समझौता किया। कुछ मामलों की जानकारी उच्चाधिकारियों तक पहुंचने के बाद संबंधित पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई भी हुई थी।
अंशिका ने वर्ष 2021 से 2025 के बीच गोरखपुर और संतकबीरनगर में दुष्कर्म, पॉक्सो एक्ट और अन्य गंभीर धाराओं में कई मुकदमे दर्ज कराए। बाद में सुलह के नाम पर मोटी रकम वसूली। संतकबीरनगर में एक मकान मालिक पर केस दर्ज कराकर उसे जेल भिजवाया गया और दो लाख रुपये की मांग की गई। जेल में भी अंशिका उससे मिलने गई और रुपये की मांग की।
जांच में यह भी सामने आया है कि अंशिका की पहुंच विधायक और पुलिसकर्मियों तक थी। वह उनके साथ तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर डालती थी, जिससे लोगों पर दबाव बनता था।
फिलहाल पुलिस ने अंशिका का मोबाइल फोन कब्जे में लेकर डिजिटल साक्ष्यों की जांच शुरू कर दी है। गोलीकांड के बाद दर्ज सभी पुराने मामलों को भी दोबारा खंगाला जा रहा है। पुलिस का कहना है कि पूरे नेटवर्क का खुलासा कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।