बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों की उलटी गिनती शुरू हो गई है। कल यानी 14 नवंबर को साफ हो जाएगा कि बिहार की सत्ता की चाबी किसके हाथ लगती है.
इस बार का मुकाबला दिलचस्प है एक ओर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हैं, जो अपने 20 साल के शासनकाल और विकास कार्यों का हवाला देकर जनता का दिल जीतने की कोशिश में जुटे हैं. उन्होंने चुनाव प्रचार में बार-बार लालू राज को ‘जंगलराज’ बताते हुए उसे मुद्दा बनाया.
वहीं दूसरी ओर तेजस्वी यादव हैं, जिन्होंने चुनावी मैदान में युवाओं और स्थानीय मुद्दों को केंद्र में रखा. उन्होंने रोजगार, सरकारी नौकरी और पलायन जैसे विषयों पर जनता से सीधा संवाद किया. साथ ही उन्होंने नीतीश कुमार की सेहत और थकान को भी प्रचार का हिस्सा बनाया.
तेजस्वी यादव के प्रति युवाओं का आकर्षण इस चुनाव में साफ नजर आया. लगभग सभी एग्जिट पोल में यह रुझान दिखा कि युवाओं का झुकाव महागठबंधन की ओर है। पटना, दरभंगा, मुजफ्फरपुर और गया जैसे शहरी इलाकों में यह रुझान और भी स्पष्ट दिखाई दे रहा है.
Vote Vibe Exit Poll 2025 के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, मुख्यमंत्री पद की रेस में तेजस्वी यादव फिलहाल सबसे आगे हैं। सर्वे के अनुसार, करीब 35% लोगों ने तेजस्वी यादव को अपनी पहली पसंद बताया है, जबकि 33% मतदाता अब भी नीतीश कुमार के साथ खड़े हैं। वहीं, जन सुराज प्रमुख प्रशांत किशोर को लगभग 9% मतदाताओं का समर्थन मिला है। यानी, तस्वीर साफ है कि बिहार की जनता अब भी “अनुभव बनाम बदलाव” के बीच बंटी हुई है और अंतिम फैसला 14 नवंबर की गिनती पर ही निर्भर करेगा।
अब देखने वाली बात होगी कि 14 नवंबर को जनता किसके वादों और नेतृत्व पर भरोसा जताती है नीतीश कुमार के “अनुभव” पर या तेजस्वी यादव के “बदलाव” पर.
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