महाराष्ट्र की सियासत में इन दिनों सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर ही रणनीतिक खींचतान देखने को मिल रही है। उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की ओर से शुरू किए गए कथित ‘ऑपरेशन तुतारी’ पर फिलहाल ब्रेक लग गया है। सूत्रों के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी (भारतीय जनता पार्टी) नेतृत्व ने इस अभियान को आगे बढ़ाने को लेकर सतर्क रुख अपनाया है।
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि अगर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के शरद पवार गुट से कोई सांसद सत्तारूढ़ महायुति में शामिल होना चाहता है, तो उसे सीधे शिंदे खेमे में आने के बजाय दूसरे सहयोगी गुट के जरिए लाने की सलाह दी गई है। इससे गठबंधन के भीतर संतुलन बनाए रखने की कोशिश मानी जा रही है।
बताया जा रहा है कि इस अभियान के जरिए शिंदे गुट, NCP और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के कुछ सांसदों को अपने साथ लाने की रणनीति पर काम कर रहा था। चर्चा थी कि दोनों खेमों से करीब आधा दर्जन सांसदों से संपर्क साधा गया है, जिससे लोकसभा में संख्या बढ़ाने की योजना थी।
यदि यह रणनीति सफल होती, तो शिंदे गुट की ताकत दोगुनी से अधिक हो सकती थी। इसे भविष्य की राजनीति खासकर 2029 के आम चुनाव को ध्यान में रखते हुए देखा जा रहा है, जहां ज्यादा सीटों पर दावा करने की तैयारी थी। हालांकि, फिलहाल सहयोगी दल की सहमति के बिना इस दिशा में आगे बढ़ने पर रोक लगती दिख रही है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विपक्षी खेमों के कुछ सांसदों में असंतोष की स्थिति हो सकती है। इसके पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं
इन परिस्थितियों में सत्तारूढ़ गठबंधन के प्रति आकर्षण बढ़ना स्वाभाविक माना जा रहा है, लेकिन फिलहाल बीजेपी नेतृत्व संतुलित और नियंत्रित विस्तार की रणनीति पर चलते हुए दिख रहा है।
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