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क्या अब लीक नहीं होंगे एग्जाम पेपर? जानिए कौन हैं नंदन नीलेकणि, जिन्हें सौंपी गई सबसे बड़ी जिम्मेदारी!

हाल के दिनों में NEET परीक्षा में हुई धांधली से राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की साख पर उठते सवालों के बीच सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने राष्ट्रीय परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर प्रशासनिक और तकनीकी सुधार करने के लिए एक ‘हाई-पावर टास्क फोर्स’ का गठन किया है, और इसकी कमान सौंपी है इंफोसिस के को-फाउंडर और आधार  के मेकर नंदन नीलेकणि को। जिसमे बाद ये सवाल उठने लगे है की क्या नीलेकणि का तकनीकी अनुभव भारत के इस परीक्षा ढांचे को पूरी तरह सुरक्षित और लीक-प्रूफ बना पाएगा?

कौन हैं नंदन नीलेकणि?

नंदन नीलेकणि भारतीय आईटी और डिजिटल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक जाना-माना नाम हैं, IIT बॉम्बे से पढ़ाई करने के बाद, नीलेकणि ने 1981 में एन.आर. नारायण मूर्ति के साथ मिलकर इंफोसिस की स्थापना की। वे 2002 से 2007 तक इसके CEO रहे और वर्तमान में इसके चेयरमैन हैं।

2009 में उन्होंने सार्वजनिक क्षेत्र का रुख किया और UIDAI के पहले अध्यक्ष बने। भारत के लगभग 140 करोड़ नागरिकों को बायोमेट्रिक पहचान देने वाले दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल प्रोजेक्ट ‘आधार’ का श्रेय उन्हीं को जाता है।

नीलेकणि का योगदान केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। भारत में डिजिटल भुगतान क्रांति लाने वाले UPI और FASTag जैसे प्लेटफॉर्म्स के पीछे भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाने का ‘डिजिटल फॉर्मूला’

NEET जैसी परीक्षाओं में धांधली और लीकेज रोकने के लिए नीलेकणि की टास्क फोर्स मुख्य रूप से इन पहलुओं पर काम कर सकती है:

एंड-टू-एंड डिजिटल सुरक्षा: पारंपरिक पेपर प्रिंटिंग और ट्रांसपोर्टेशन में मानवीय हस्तक्षेप बहुत ज्यादा होता है, जहाँ लीकेज की गुंजाइश बनी रहती है। नीलेकणि का मुख्य फोकस पूरे सिस्टम को एनक्रिप्टेड प्रश्नपत्रों, डिजिटल लॉक और बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन से लैस करने पर होगा।

AI से निगरानी: परीक्षा केंद्रों में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी रोकने के लिए AI-बेस्ड सीसीटीवी सर्विलांस, बायोमेट्रिक अटेंडेंस और डेटा एनालिटिक्स का सहारा लिया जाएगा ताकि संदिग्ध गतिविधियों की तुरंत पहचान हो सके।

NTA का पुनर्गठन:  नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के मौजूदा ढांचे, सर्वर सुरक्षा और डेटा प्रोटोकॉल को नए सिरे से री-डिजाइन किया जाएगा, जिससे यह ढांचा पूरी तरह “हैक-प्रूफ” और “लीक-प्रूफ” बन सके।

नंदन नीलेकणि का इस टास्क फोर्स की कमान संभालना NEET और अन्य राष्ट्रीय परीक्षाओं में पारदर्शिता और भरोसा बहाल करने की दिशा में एक अहम कदम है। अब देखना यह होगा कि उनका यह “डिजिटल मॉडल” देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य को कितना सुरक्षित और निष्पक्ष बना पाता है।

news desk

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