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“सिर्फ प्रदर्शन होने पर नहीं चला सकते लाठियां!” छात्र आंदोलनों पर पुलिसिया कार्रवाई पर SC सख्त, CCTV और फुटेज सुरक्षित रखने की मांग

नई दिल्ली। देश के विभिन्न हिस्सों में नीट (NEET) पेपर लीक को लेकर हो रहे छात्र आंदोलनों और उन पर हुए लाठीचार्ज के बीच सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने एक बेहद सख्त और महत्वपूर्ण टिप्पणी की है।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने दोटूक कहा है कि “सिर्फ आंदोलन या विरोध प्रदर्शन होने के आधार पर पुलिस प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज नहीं कर सकती।”

अदालत ने बिहार के सिवान में प्रदर्शनकारी छात्रों पर AK-47 असॉल्ट राइफल से फायरिंग और दिल्ली के जंतर-मंतर पर पेलेट गन व बल प्रयोग के आरोपों पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि पुलिस द्वारा अत्यधिक बल प्रयोग (Excessive Force) के सभी मामलों की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट में PIL: “CCTV, ड्रोन फुटेज और वायरलेस रिकॉर्ड्स को तुरंत किया जाए जब्त”

जंतर-मंतर और सिवान में हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में एडवोकेट प्रिया मिश्रा (अधिवक्ता नरेंद्र मिश्रा के माध्यम से) ने सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की है।

इस याचिका में शीर्ष अदालत से ‘रिट ऑफ मैंडेमस’ (Writ of Mandamus) जारी करने की मांग की गई है, ताकि पुलिस कार्रवाई से जुड़े तमाम सबूतों के साथ छेड़छाड़ न की जा सके:

  • डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य: घटनास्थल के सभी सीसीटीवी (CCTV) फुटेज, पुलिस के बॉडी-वॉर्न कैमरा रिकॉर्डिंग्स, ड्रोन फुटेज, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और मोबाइल रिकॉर्डिंग्स को तुरंत सील व संरक्षित किया जाए।
  • प्रशासनिक रिकॉर्ड्स: घटना के वक्त का पुलिस वायरलेस कम्युनिकेशन, कंट्रोल रूम लॉग बुक, सुरक्षा बलों की तैनाती के लिखित आदेश और जीपीएस (GPS) डेटा तुरंत जांच एजेंसियों के सुपुर्द किया जाए।

“संज्ञेय अपराध पर तुरंत दर्ज हो FIR”: याचिकाकर्ता की मांग

जनहित याचिका में कोर्ट से मांग की गई है कि जिन भी पुलिसकर्मियों या अधिकारियों पर अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर शक्ति के दुरुपयोग या आपराधिक कार्रवाई (Cognizable Offence) में शामिल होने के सबूत मिलें, उन पर तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज की जाए।

याचिका के अनुसार, साक्ष्यों के नष्ट होने या दबाए जाने की आशंका को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट को एक स्वतंत्र और समयबद्ध (Time-bound) न्यायिक जांच के आदेश देने चाहिए।

CJI सूर्यकांत की पीठ का कड़ा संदेश

इससे पहले जंतर-मंतर पर हुई घटना पर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को एक पत्र भेजकर संज्ञान लेने की अपील की गई थी। हालांकि, सोमवार को मेंशनिंग (Mentioning) के दौरान जब यह पूरा मामला पीठ के समक्ष आया, तो सीजेआई सूर्यकांत ने साफ कर दिया कि कानून-व्यवस्था और नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखना सुरक्षा बलों की पहली जिम्मेदारी है।

अदालत के इस कड़े रुख के बाद अब केंद्र और राज्य पुलिस प्रशासनों पर प्रदर्शनकारियों को संभालने के तरीकों में पारदर्शिता लाने का भारी दबाव बन गया है।

news desk

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