Trending News

बिहार में शुरू हो गया सियासी खेला? नीतीश कुमार की इस चाल से बीजेपी की बढ़ी टेंशन!

बिहार की सियासी बिसात पर इस समय सबसे ज्यादा चुनौती किसी के सामने है तो वो पार्टी है बीजेपी. करीब 20 वर्षों से बिहार की सत्ता पर अपनी सहयोगी जेडीयू के साथ काबिज बीजेपी पिछले कुछ समय से ये जाहिर करने लगी थी कि अब बिहार में उसका मुख्यमंत्री होना चाहिए. लेकिन 2025 के विधानसभा चुनाव से पहले परिस्थितियां ऐसी बन गई है कि बीजेपी के सामने सत्ता में बने रहना भी मुश्किल दिख रहा है.

एक तरफ आरजेडी और तेजी से उभरती कांग्रेस का गठबंधन है, तो दूसरी तरफ अपने ही सहयोगी दलों के दांव पेंच से बीजेपी चौतरफा फंसी हुई है. बीजेपी का सिरदर्द चिराग पासवान, जीतन राम मांझी या फिर उपेन्द्र कुशवाहा नहीं है बल्कि बीजेपी के सबसे पुराने साथी नीतीश कुमार बन गए हैं. नीतीश कुमार समता पार्टी के जमाने से बीजेपी के साथ हैं. लेकिन 2014 के बाद नीतीश और बीजेपी साथ तो हैं लेकिन एक दूसरे को शक की निगाह से देखते हुए. यही कारण है कि नीतीश कुमार 2014 के बाद से 2 बार राज्य में आरजेडी के साथ भी अल्प समय के लिए सरकार बना चुके हैं.

कहीं पर निगाहें, कहीं पर निशाना!

इस बार नीतीश कुमार वैसे तो बीजेपी गठबंधन में ही हैं. लेकिन काम ऐसा कर रहे हैं जिससे बीजेपी का नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है. असल में 29 अगस्त को बिहार में मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना को मंजूरी मिली. इस येजना के तहत करीब 75 लाख महिलाओं को 10 हजार रूपये दिया जाना है. ताकि वो अपना उद्यम शुरू कर अपने पैरों पर खड़ी हो सकें. विधानसभा चुनाव से ठीक पहले शुरू की गई इस योजना को नीतीश कुमार का मास्टरस्ट्रोक कहा गया. लेकिन अब यही योजना बीजेपी के लिए मुसीबत बनने जा रही है.

वरिष्ठ पत्रकार अभिषेक कुमार की माने तो नीतीश कुमार की इस योजना की लाभार्थी उन विधानसभा सीटों पर ज्यादा महिलाएं बन रही हैं जो गठबंधन में जेडीयू कोटे में आती हैं. इसे सीधे तौर पर ऐसे समझिए सीट बंटवारे में जो सीटे जेडीयू के कोटे में आनी है उन सीटों वाले इलाके में ज्यादा महिलाओं को इस योजना का लाभ मिल रहा है. इसमें ज्यादातर सीटें ग्रामीण हैं. बीजेपी के कोटे में ज्यादातर सीटें शहरी आती हैं. वहां इस योजना का लाभ उतना नहीं पहुंच रहा है. ऐसे में जेडीयू को इस योजना का लाभ तो मिलेगा लेकिन क्या बीजेपी को भी महिलाओं को उतना ही वोट मिलेगा, ये सवाल बीजेपी के लिए टेंशन बढ़ा रहा है.

क्या नीतीश ले रहें हैं 2020 का बदला?

इस खेल को समझने वाले कहते हैं कि जैसे 2020 के चुनाव में ‘चिराग मॉडल’ का इस्तेमाल करके नीतीश कुमार को कमजोर किया गया. उससे आशंकित नीतीश कुमार इस बार न सिर्फ फूंक फूंक कर कदम रख रहे हैं बल्कि 2020 के नतीजे को उल्टा करने की कोशिश भी कर रहे हैं. यानी सरकार तो एनडीए की ही बने लेकिन जेडीयू की सीटें बीजेपी से ज्यादा आएं. लेकिन कहीं ऐसा ना हो कि इस गुणा गणित में बाजी महागठबंधन मार ले. क्योंकि पिछले चुनाव में ही दोनों गठबंधन के बीच महज 12 हजार वोटों का अंतर था.

अभी तक एनडीए की तरफ से ऑफिशियली ये नहीं कहा गया है कि बहुमत आने के बाद नीतीश कुमार ही सीएम बनेंगे. हालांकि इंकार भी नहीं किया गया है. लेकिन राजनीतिक संकेतों की माने तो अगर एनडीए को बहुमत आता है तो नीतीश कुमार को सीएम नहीं बनाया जाएगा. ऐसे में नीतीश कुमार अपनी गोटी भी चलना शुरू कर चुके हैं.

news desk

Recent Posts

काशी रुद्रास के खिलाड़ी ट्रायल्स को जबरदस्त प्रतिसाद, UPT20 सीज़न 4 से पहले 1,100 से अधिक खिलाड़ियों ने कराया पंजीकरण

वाराणसी। स्थानीय प्रतिभाओं की पहचान और उन्हें निखारने की अपनी प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाते हुए,…

40 minutes ago

Google ने लॉन्च किया अब तक का सबसे तेज़ और अफोर्डेबल AI Image Model! बस 4 सेकंड में तैयार होगी हाई-क्वालिटी इमेज

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की रेस में Google ने एक और बड़ा कदम उठाते हुए अपना नया…

2 hours ago

बर्थडे पर राहुल गांधी की ‘बर्थडे डिप्लोमेसी’: अखिलेश को बधाई में PDA का संदेश, क्या सुलझेगी सीट-शेयरिंग की रार?

लखनऊ। समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव आज…

2 hours ago