Latest News

यूपीआई के 10 साल पूरे, डिजिटल भुगतान में 86.8% हिस्सेदारी; रोज हो रहे 66 करोड़ से ज्यादा लेनदेन

नई दिल्ली: भारत की डिजिटल भुगतान व्यवस्था में एक दशक पूरा कर चुके यूपीआई ने देश में लेनदेन के तौर-तरीकों को बड़े स्तर पर बदल दिया है। 25 अगस्त 2016 को शुरू हुई एकीकृत भुगतान इंटरफेस व्यवस्था के दस वर्ष पूरे होने पर सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में कुल डिजिटल लेनदेन की मात्रा में यूपीआई की हिस्सेदारी बढ़कर 86.8 प्रतिशत हो गई। वित्त वर्ष 2022-23 में यह आंकड़ा 73.6 प्रतिशत था।

यूपीआई की शुरुआत भारतीय रिजर्व बैंक की देखरेख में भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम ने की थी। जब यह व्यवस्था शुरू हुई थी, तब देश में डिजिटल लेनदेन की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत से भी कम थी। एक दशक के भीतर यूपीआई देश में भुगतान का सबसे प्रमुख माध्यम बन गया है और भारत की डिजिटल भुगतान व्यवस्था को वैश्विक पहचान भी मिली है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूपीआई के दस वर्ष पूरे होने पर इसे भारत की डिजिटल भुगतान यात्रा में बड़ा बदलाव लाने वाला माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि एक दशक पहले शुरू हुई इस व्यवस्था ने देश में डिजिटल भुगतान के तरीके को बदल दिया है। प्रधानमंत्री ने लोगों से यूपीआई से जुड़े अपने अनुभव और इससे जीवन में आए बदलाव साझा करने की अपील भी की।

1.78 करोड़ से बढ़कर 24,162 करोड़ हुआ लेनदेन

यूपीआई के विस्तार की रफ्तार का अंदाजा इसके शुरुआती और मौजूदा आंकड़ों से लगाया जा सकता है। वित्त वर्ष 2016-17 में यूपीआई के जरिए 1.78 करोड़ लेनदेन हुए थे। वित्त वर्ष 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 24,162 करोड़ से अधिक हो गई। यानी करीब दस साल में लेनदेन की संख्या लगभग 13 हजार गुना बढ़ी।

लेनदेन के कुल मूल्य में भी भारी बढ़ोतरी हुई। वित्त वर्ष 2016-17 में यूपीआई के जरिए करीब 0.07 लाख करोड़ रुपये के लेनदेन हुए थे। 2025-26 में इनका कुल मूल्य बढ़कर लगभग 314 लाख करोड़ रुपये हो गया। इस तरह करीब एक दशक में लेनदेन के मूल्य में 4,000 गुना से अधिक वृद्धि हुई।

वित्त वर्ष 2025-26 में यूपीआई लेनदेन की संख्या में सालाना करीब 30 प्रतिशत और कुल मूल्य में 21 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वर्ष 2026 में रोजाना औसतन करीब 66 करोड़ यूपीआई लेनदेन हो रहे हैं। जुलाई 2026 में भी यूपीआई ने नया मासिक रिकॉर्ड बनाया। इस दौरान 2,366 करोड़ लेनदेन हुए, जिनका कुल मूल्य करीब 29.88 लाख करोड़ रुपये रहा।

रियल टाइम भुगतान में दुनिया में भारत का दबदबा

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के मुताबिक, लेनदेन की संख्या के आधार पर यूपीआई दुनिया की सबसे बड़ी रियल टाइम भुगतान प्रणालियों में प्रमुख स्थान रखता है। वर्ष 2025 में दुनिया भर में हुए रियल टाइम भुगतान लेनदेन की कुल मात्रा में यूपीआई की हिस्सेदारी करीब 49 प्रतिशत रही।

यूपीआई से जुड़ने वाले बैंकों की संख्या में भी लगातार इजाफा हुआ है। वित्त वर्ष 2016-17 में 44 बैंक यूपीआई पर सक्रिय थे। यह संख्या वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 703 और जुलाई 2026 तक 741 हो गई। यूपीआई की शुरुआत के समय 21 बैंक इससे जुड़े थे।

11 देशों तक पहुंचा यूपीआई

भारत की यह भुगतान व्यवस्था अब देश की सीमाओं से बाहर भी पहुंच चुकी है। यूपीआई संयुक्त अरब अमीरात, फ्रांस, भूटान, श्रीलंका, नेपाल, सिंगापुर, मारीशस, कतर, कंबोडिया, ग्रीस और मालदीव समेत 11 देशों में संचालित हो रही है। इसके विस्तार से भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बढ़ावा मिला है।

बढ़ते इस्तेमाल के बीच आर्थिक स्थिरता बड़ी चुनौती

यूपीआई के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के साथ अब इसकी दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता को लेकर भी चर्चा हो रही है। केयरएज एनालिटिक्स एंड एडवाइजरी के मुताबिक, अधिक मूल्य वाले कुछ व्यापारिक लेनदेन पर लक्षित मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू करने जैसे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।

हाल ही में संसद ने भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन किया है। इसके बाद सरकार को यूपीआई लेनदेन पर लागू मौजूदा शून्य मर्चेंट डिस्काउंट रेट व्यवस्था में बदलाव करने का अधिकार मिला है। हालांकि उपभोक्ताओं से भुगतान के लिए कोई लेनदेन शुल्क नहीं लिया जाएगा और व्यक्ति से व्यक्ति होने वाले भुगतान पहले की तरह मुफ्त रहेंगे।

बड़े व्यापारिक लेनदेन पर शुल्क की संभावना

संभावना जताई जा रही है कि तय सीमा से अधिक मूल्य वाले कुछ चुनिंदा व्यापारिक लेनदेन पर मामूली मर्चेंट डिस्काउंट रेट लगाया जा सकता है। इस संबंध में फैसला यूपीआई और सेवा निगरानी समिति करेगी। फिलहाल व्यक्ति से व्यापारी को किए जाने वाले भुगतान यूपीआई के कुल लेनदेन मूल्य का करीब 29 प्रतिशत हैं।

एक दशक में यूपीआई ने देश में भुगतान को तेज और आसान बनाने के साथ डिजिटल अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा दी है। अब इसके सामने बढ़ते इस्तेमाल, अंतरराष्ट्रीय विस्तार और तकनीकी बदलाव के बीच व्यवस्था को सस्ता, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाए रखने की चुनौती है।

vineet verma

Recent Posts

Hasan Mahmud Hat-Trick: हसन महमूद ने रचा इतिहास, बांग्लादेश के पहले तेज गेंदबाज बने

बांग्लादेश के तेज गेंदबाज हसन महमूद ने अफगानिस्तान के खिलाफ अबू धाबी में खेले जा…

2 hours ago

दिल्ली प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, मेट्रो और इंटरनेट सेवाएं बहाल करने का निर्देश, केंद्र से मांगा हलफनामा

नई दिल्ली। दिल्ली में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने और सुरक्षा प्रतिबंधों को लेकर सुप्रीम…

3 hours ago

CJP नेताओं और ध्रुव राठी को राहत, दिल्ली पुलिस की हिरासत से रिहा, एक साल शांति बनाए रखने की शर्त

नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रस्तावित प्रदर्शन…

4 hours ago

ट्रम्प-पुतिन डील पर अमेरिकी संसद में बगावत: रिपब्लिकन सांसद ही लाएंगे नया बिल, भारत-चीन पर 100% टैरिफ वाले कानून का उल्लंघन?

वाशिंगटन। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ एक फोन कॉल के बाद डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा…

4 hours ago

रियाद एयरपोर्ट पर भीषण मिसाइल हमला: 12 की मौत, 300+ घायल; अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की कड़ी चेतावनी के बाद मध्य पूर्व में तनाव चरम पर

नई दिल्ली / रियाद:। सऊदी अरब की राजधानी रियाद स्थित किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर…

5 hours ago