6 अक्टूबर को पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी ज़िले के नागराकाटा इलाके में उस वक्त माहौल तनावपूर्ण हो गया जब बाढ़ राहत के सिलसिले में पहुंचे भारतीय जनता पार्टी के सांसद खगेन मुर्मू और विधायक शंकर घोष पर अचानक स्थानीय भीड़ ने हमला कर दिया. मौके पर मौजूद चश्मदीदों के मुताबिक, जैसे ही भाजपा नेता राहत सामग्री के साथ प्रभावित क्षेत्र में पहुंचे, कुछ स्थानीय लोगों ने नाराज़गी जाहिर करते हुए उनका विरोध शुरू कर दिया, जो जल्द ही हिंसा में तब्दील हो गया. भीड़ ने नेताओं की गाड़ियों पर पथराव किया और कुछ वाहनों को चकनाचूर कर दिया. मारपीट में दोनों नेता घायल हो गए.
भाजपा का आरोप: सोची-समझी रणनीति
भाजपा की ओर से इसे पूर्व-नियोजित राजनीतिक हमला बताया जा रहा है. पार्टी नेताओं ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पर आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा के जनाधार से घबराई टीएमसी अब हिंसा का सहारा ले रही है. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, “हमारे जनप्रतिनिधियों पर दिनदहाड़े हमला यह साबित करता है कि राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह फेल हो चुकी है.”
हालांकि, घटनास्थल पर मौजूद कुछ स्थानीय लोगों का दावा है कि राहत सामग्री का वितरण अनुचित और भेदभावपूर्ण तरीके से किया जा रहा था, जिससे लोग भड़क उठे. कुछ का कहना है कि लोगों की लंबे समय से अनसुनी शिकायतों का कोई जवाब नहीं मिल रहा था, और इसी नाराज़गी ने उग्र रूप ले लिया.
प्रशासन की प्रतिक्रिया
पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रण में लिया और दोनों नेताओं को अस्पताल पहुंचाया. फिलहाल मामले की जांच जारी है, हालांकि अभी तक किसी की गिरफ्तारी की सूचना नहीं है. प्रशासन ने हिंसा के पीछे की वजह जानने के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की बात कही है.
राजनीतिक तापमान चढ़ा
इस घटना ने बंगाल की राजनीति में फिर से हलचल मचा दी है. भाजपा ने पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है, जबकि टीएमसी ने किसी भी राजनीतिक साजिश से इनकार किया है. राजनीतिक नेताओं की सुरक्षा, जनता का आक्रोश और राहत कार्यों में पारदर्शिता जैसे मुद्दे एक बार फिर सुर्खियों में हैं.