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जिस सीरिया को कल तक अमेरिका मानता था आतंकी मुल्क, आज उसी को ब्लैकलिस्ट से क्यों हटाना चाहते हैं ट्रंप?

वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीरिया को आतंकवाद प्रायोजक देशों की सूची से हटाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। जिस सीरिया को अमेरिका पिछले 47 वर्षों से आतंकवाद को समर्थन देने वाले देशों की सूची में शामिल रखे हुए था, अब उसी पर ट्रंप प्रशासन का रुख नरम पड़ता दिख रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने जानकारी दी कि इस संबंध में अमेरिकी कांग्रेस को औपचारिक रूप से सूचित कर दिया गया है। उनका कहना है कि इस फैसले से सीरिया के आर्थिक पुनर्निर्माण और वहां के लोगों के लिए नए अवसरों का रास्ता खुल सकता है।

नाटो सम्मेलन के बाद बदला ट्रंप का रुख

यह घोषणा उस समय सामने आई, जब तुर्किये की राजधानी अंकारा में आयोजित नाटो शिखर सम्मेलन 2026 के दौरान ट्रंप की मुलाकात सीरिया के अंतरिम राष्ट्रपति अहमद अल-शरा से हुई। मुलाकात के बाद ट्रंप ने कहा कि सीरिया ने हाल के समय में सकारात्मक काम किया है और उनका मानना है कि अब उसे आतंकवाद प्रायोजक देशों की सूची से बाहर किया जाना चाहिए।

47 साल से ब्लैकलिस्ट में शामिल है सीरिया

सीरिया को दिसंबर 1979 में अमेरिका के विदेश विभाग ने आतंकवाद प्रायोजक देशों की सूची में शामिल किया था। हालांकि दिसंबर 2024 में बशर अल-असद सरकार के सत्ता से हटने के बाद से अमेरिका के रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों दलों के कई सांसद इस दर्जे को समाप्त करने की मांग कर चुके हैं। ट्रंप प्रशासन का ताजा कदम उसी दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है।

अमेरिका-सीरिया रिश्तों को सामान्य बनाने की कोशिश

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला दोनों देशों के संबंधों को सामान्य बनाने की रणनीति का हिस्सा है। इससे पहले ट्रंप प्रशासन हयात तहरीर अल-शाम (एचटीएस), जिसे अल-नुसरा फ्रंट के नाम से भी जाना जाता है, को विदेशी आतंकवादी संगठनों की सूची से हटा चुका है। यही संगठन बशर अल-असद सरकार के खिलाफ विद्रोह का प्रमुख चेहरा रहा था और इसका नेतृत्व अहमद अल-शरा ने किया था।

लेबनान से जुड़ा है पूरा समीकरण

नाटो सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इजरायल दक्षिण लेबनान से अपनी सेना वापस बुला लेगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि क्षेत्रीय हालात को सामान्य बनाने में सीरिया महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

इससे पहले फ्रांस में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान भी ट्रंप ने कतर के अमीर के साथ बातचीत में कहा था कि लेबनान में हिजबुल्लाह से जुड़े मुद्दों के समाधान में सीरिया और उसके राष्ट्रपति अहमद अल-शरा अहम भूमिका निभा सकते हैं। उनका मानना है कि यदि इजरायल यह काम अकेले नहीं कर पाता, तो सीरिया क्षेत्रीय स्थिरता बहाल करने में मदद कर सकता है।

कौन हैं अहमद अल-शरा, जिनसे बदली अमेरिका की सोच?

अहमद अल-शरा दिसंबर 2024 में बशर अल-असद सरकार के पतन के बाद सीरिया की सत्ता में आए। उन्हें अबू मोहम्मद अल-जुलानी के नाम से भी जाना जाता है। एक समय वह दुनिया के सबसे वांछित लोगों में शामिल थे और अल-कायदा से जुड़े चरमपंथी गुटों का नेतृत्व करने के आरोप में अमेरिका ने उनके ऊपर एक करोड़ अमेरिकी डॉलर का इनाम घोषित किया था। हालांकि 2024 के अंत में राजनयिक वार्ताओं के बाद अमेरिका ने यह इनामी घोषणा वापस ले ली थी।

vineet verma

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