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तुर्किये नए विमान से पहुंचे थे ट्रंप, लेकिन लौटते वक्त अचानक बदल दिया प्लेन… आखिर उड़ान से पहले ऐसा क्या हुआ कि पुराने एयर फोर्स वन में बैठना पड़ा?

वॉशिंगटन: तुर्किये में आयोजित नाटो शिखर सम्मेलन से लौटते समय अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक फैसले ने दुनियाभर का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। ट्रंप जिस नए विमान से सम्मेलन में पहुंचे थे, वापसी के लिए उन्होंने उसी का इस्तेमाल नहीं किया। इसके बजाय उन्होंने करीब साढ़े तीन दशक पुराने एयर फोर्स वन से अमेरिका लौटना चुना। इस फैसले के बाद नए विमान की सुरक्षा और राष्ट्रपति की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।

नया बोइंग 747-800 विमान कतर की ओर से अमेरिका को उपहार में दिया गया था। बाद में इसे राष्ट्रपति की यात्रा के अनुरूप तैयार करने पर करीब 40 करोड़ डॉलर खर्च किए गए। हालांकि वापसी के समय ट्रंप पुराने बोइंग VC-25A एयर फोर्स वन में सवार हुए, जबकि नया विमान अलग से ब्रिटेन स्थित आरएएफ मिल्डेनहॉल एयरबेस भेज दिया गया।

विमान बदलने पर ट्रंप ने क्या कहा?

जब पत्रकारों ने विमान बदलने की वजह पूछी तो ट्रंप ने कहा कि वह “पुराने दिनों की याद” में पुराने एयर फोर्स वन से घर लौटना चाहते थे। उन्होंने यह भी बताया कि नया विमान आरएएफ मिल्डेनहॉल एयरबेस जाएगा, जहां तैनात अमेरिकी सैनिक उसे देखेंगे।

क्या सुरक्षा कारणों से लिया गया फैसला?

यह फैसला ऐसे समय सामने आया, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ा हुआ था। अमेरिका की सैन्य कार्रवाई के बाद क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति को लेकर सतर्कता बढ़ गई थी। तुर्किये की सीमा ईरान से लगती है, इसलिए राष्ट्रपति की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त एहतियात की अटकलें भी लगाई गईं।

हालांकि ट्रंप ने सीधे तौर पर सुरक्षा को वजह नहीं बताया, लेकिन उन्होंने यह जरूर कहा कि “ईरान के निशाने पर सबसे ऊपर मैं ही हूं।” जब उनसे नए विमान की सुरक्षा को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने केवल इतना कहा कि वह सामान्य तरीके से घर लौट रहे हैं।

नए विमान की सुरक्षा पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?

विशेषज्ञों के अनुसार, कतर से मिले नए विमान में अभी वे सभी अत्याधुनिक सुरक्षा प्रणालियां नहीं हैं, जो पारंपरिक एयर फोर्स वन में मौजूद हैं। सार्वजनिक तस्वीरों से संकेत मिलता है कि इसमें कुछ महत्वपूर्ण मिसाइल पहचान और मिसाइल-रोधी सुरक्षा प्रणालियां फिलहाल नहीं लगी हैं। इसी वजह से विमान बदलने के फैसले को सुरक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है।

वहीं व्हाइट हाउस का कहना है कि नए विमान में राष्ट्रपति और उनके स्टाफ की सुरक्षा के लिए उच्च स्तर के सुरक्षा प्रोटोकॉल मौजूद हैं। प्रशासन का यह भी कहना है कि राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए कई बार भ्रम पैदा करने जैसी रणनीतियां भी अपनाई जाती हैं।

उड़ान के दौरान ट्रांसपोंडर भी कुछ समय रहा बंद

पुराने एयर फोर्स वन से उड़ान भरने के दौरान शुरुआती चरण में विमान का ट्रांसपोंडर कुछ समय के लिए बंद कर दिया गया। इसी प्रणाली के जरिए किसी विमान की लाइव लोकेशन दिखाई देती है। आमतौर पर ऐसा कदम बेहद संवेदनशील सुरक्षा परिस्थितियों में उठाया जाता है। दिलचस्प बात यह रही कि उसी समय अन्य देशों के नेताओं के विमानों की लाइव लोकेशन सामान्य रूप से दिखाई देती रही।

ईरान से कितना है खतरा?

रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के पास ऐसे ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलें हैं जिनकी मारक क्षमता लगभग 1,300 किलोमीटर तक बताई जाती है। इनमें शाहेद ड्रोन और शाहाब बैलिस्टिक मिसाइलें शामिल हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के पास फिलहाल इतनी क्षमता नहीं है कि वह ब्रिटेन जैसी दूर स्थित जगह पर प्रभावी हमला कर सके।

पुराना एयर फोर्स वन आज भी क्यों माना जाता है सबसे सुरक्षित?

मौजूदा एयर फोर्स वन को विशेष रूप से अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था। इसमें परमाणु हमले के प्रभाव को सहने की क्षमता, अत्याधुनिक मिसाइल-रोधी प्रणाली, सुरक्षित संचार व्यवस्था, विमान के भीतर चिकित्सा सुविधा और हवा में ईंधन भरने जैसी विशेषताएं मौजूद हैं। यही वजह है कि आज भी इसे दुनिया के सबसे सुरक्षित सरकारी विमानों में गिना जाता है।

vineet verma

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