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UPI पर चार्ज लगने की आशंका से क्यों बढ़ी कारोबारियों की टेंशन? कानपुर में दुकानदार ग्राहकों से मांगने लगे कैश

कानपुर: यूपीआई भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) यानी शुल्क लगाए जाने की आशंका ने कानपुर के कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है। दुकानदारों का कहना है कि अगर छोटे डिजिटल लेनदेन पर भी शुल्क लगा, तो कम मार्जिन वाले कारोबार की लागत बढ़ जाएगी। इसी आशंका के बीच कई दुकानदार ग्राहकों से नकद भुगतान करने का आग्रह करने लगे हैं। बाजार में डिजिटल पेमेंट के साथ कैश की मांग भी बढ़ने लगी है।

‘क्यूआर कोड दिखाइए और भुगतान पाइए’ की आदत बना चुके ग्राहकों के लिए यह बदलाव नया है। पिछले कुछ वर्षों में यूपीआई ने 20-50 रुपये की छोटी खरीदारी से लेकर हजारों रुपये के भुगतान तक को आसान बनाया है। दुकानदारों को भी खुले पैसे और छुट्टे की परेशानी से राहत मिली है। लेकिन संभावित शुल्क की चर्चा ने कारोबारियों को फिर नकदी की ओर देखने पर मजबूर कर दिया है।

आभूषण कारोबार में एमडीआर का विरोध

ऑल इंडिया ज्वैलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन ने यूपीआई पर एमडीआर लगाए जाने का विरोध किया है। फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज अरोड़ा का कहना है कि बिक्री मूल्य और मुनाफे को एक जैसा नहीं माना जा सकता। उनके मुताबिक, यूपीआई पर शुल्क लागू होने से छोटे कारोबारी नकद लेनदेन की ओर लौट सकते हैं।

अरोड़ा ने 15 अक्टूबर से लागू होने वाली व्यवस्था को वापस लेने या आभूषण कारोबार को इससे पूरी तरह छूट देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सोने की कीमत बढ़ने से आभूषण का बिल भले ही बड़ा दिखाई देता हो, लेकिन ज्यादातर छोटे और मध्यम ज्वैलर्स का ग्रॉस मार्जिन महज 2-3 प्रतिशत है।

प्रतिनिधि उद्योग व्यापार मंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनूप शुक्ला ने भी एमडीआर लागू होने पर कारोबारियों की परेशानी बढ़ने की आशंका जताई। उनका कहना है कि इस फैसले का व्यापार पर काफी खराब असर पड़ेगा। फिलहाल ग्राहक नकद के मुकाबले यूपीआई से ज्यादा भुगतान कर रहे हैं।

छोटे भुगतान पर शुल्क की आशंका, दुकानदार मांगने लगे कैश

नयागंज के एक किराना कारोबारी के यहां रोजाना बड़ी संख्या में छोटे यूपीआई भुगतान होते हैं। उनका कहना है कि 50-100 रुपये के लेनदेन पर भी शुल्क लगा, तो कम मार्जिन वाले सामान की लागत बढ़ जाएगी। इसी वजह से उन्हें ग्राहकों से नकद भुगतान करने का आग्रह करना पड़ रहा है।

घंटाघर इलाके में चाय और सिगरेट बेचने वाले दुकानदार भी अब ग्राहकों से कैश मांगने लगे हैं। उन्हें आशंका है कि यूपीआई पर एमडीआर लगने से कारोबार पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। ग्राहक अब तक डिजिटल भुगतान को प्राथमिकता देते रहे हैं, लेकिन शुल्क की चर्चा के बीच दुकानदार नकदी लेने पर जोर दे रहे हैं।

मोतीझील में बाटी-चोखा के लिए भी कैश की मांग

मोतीझील के पास बाटी-चोखा बेचने वाले एक दुकानदार ने यूपीआई से भुगतान लेना लगभग बंद कर दिया है। बुधवार को ग्राहक पहुंचे तो उन्हें खाना देने से पहले नकद भुगतान करने को कहा गया।

दुकानदार का मानना है कि शुल्क लागू होने पर रोज की कमाई पर असर पड़ सकता है। ऐसे में कारोबारियों के बीच यह चिंता बढ़ रही है कि डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त लागत का बोझ आखिर किसे उठाना पड़ेगा।

vineet verma

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