उत्तर प्रदेश की सियासत में एनडीए के भीतर सीटों के बंटवारे को लेकर नए समीकरण बनते दिखाई दे रहे हैं। केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने वाराणसी से बड़ा सियासी बयान देते हुए कहा कि अगर गठबंधन में उनकी पार्टी की बात नहीं बनी, तो वह यूपी की सभी 403 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं। उनके इस बयान से एनडीए के भीतर हलचल तेज हो गई है। वहीं, चिराग पासवान ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव के चुनाव न लड़ने वाले बयान पर भी तंज कसा। उनके इस रुख को यूपी की राजनीति में नई सियासी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
एनडीए की सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करनी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में उन्होंने 5 नवंबर को वाराणसी में एक विशाल संकल्प सभा को संबोधित किया और पार्टी की चुनावी ताकत को परखा।
पत्रकारों से बातचीत करते हुए चिराग पासवान ने आगामी यूपी चुनाव को लेकर अपनी मंशा बिल्कुल साफ कर दी। उन्होंने कहा कि गठबंधन को लेकर अभी तक कोई औपचारिक बातचीत शुरू नहीं हुई है, लेकिन यदि गठबंधन नहीं हो पाया, तो उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा खुद विधानसभा चुनाव न लड़कर सीधे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले बयान पर चिराग पासवान ने तीखा तंज कसा। चिराग ने इसे सपा प्रमुख का ‘डर’ करार देते हुए कहा यह हार का डर है और पार्टी के प्रदर्शन की चिंता है। लोकसभा चुनाव में इन लोगों ने झूठ बोलकर—संविधान और आरक्षण पर खतरा है—यह बताकर जैसे-तैसे वोट हासिल कर लिए थे।
लेकिन अब इन्हें डर है कि वैसा ही परिणाम आएगा जैसा महाराष्ट्र में हुआ था, जहां लोकसभा में जनता ने विपक्ष का साथ दिया, लेकिन विधानसभा में एनडीए को भारी मतों से जिताया। चिराग ने आगे सलाह देते हुए कहा कि एक सच्चे सेनापति को रणक्षेत्र में सबसे आगे बढ़कर अपने सैनिकों का मार्गदर्शन करना चाहिए, न कि महल में बैठकर युद्ध देखना चाहिए। जनता सब समझती है, इसलिए विधानसभा चुनाव न लड़ने की बात कहकर वे अपनी संभावित हार से बच रहे हैं।
वाराणसी में आयोजित इस संकल्प सभा में चिराग पासवान को सुनने के लिए हजारों की संख्या में लोग पहुंचे। चिराग का मंच पर आगमन बेहद अलग और ऊर्जावान अंदाज में हुआ। उनके मंच पर आते ही समर्थकों का उत्साह चरम पर पहुंच गया और उन्होंने अपने चिरपरिचित आक्रामक और ओजस्वी अंदाज में माइक संभालते हुए जनता को संबोधित किया।
उत्तर प्रदेश के राजनीतिक परिदृश्य में चिराग पासवान का यह कदम आने वाले समय में एनडीए और विपक्षी दलों के समीकरणों को किस तरह प्रभावित करता है, यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन इतना तय है कि यूपी का सियासी पारा अब पूरी तरह चढ़ने लगा है।
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