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बिहार विधानसभा चुनाव के बीच जनसुराज पार्टी का प्रचार उस वक्त खूनी मोड़ पर पहुंच गया, जब मोकामा में रैली के दौरान पार्टी का प्रचार कर रहे दुलारचंद यादव की जेडीयू प्रत्याशी अनंत सिंह के समर्थकों से हुई झड़प में मौत हो गई. इस घटना ने राज्य की सियासत को हिला कर रख दिया है. विपक्ष सरकार पर कानून-व्यवस्था को लेकर हमलावर है, तो वहीं, सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जिस दुलारचंद की मौत जनसुराज पार्टी के प्रचार के दौरान हुई, उसी पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर अब तक खामोश थे. हालांकि, दो दिन बाद उनका बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने दुलारचंद यादव से पल्ला झाड़ते हुए कहा है कि ‘मारे गए व्यक्ति पार्टी के आधिकारिक सदस्य नहीं थे’.
‘दुलारचंद हमारी पार्टी के सदस्य नहीं थे’ — प्रशांत किशोर
प्रशांत किशोर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि ‘मोकामा में जिनकी हत्या हुई, वे जनसुराज पार्टी के आधिकारिक सदस्य नहीं थे.’ उन्होंने कहा कि ‘हां, ये जरूर था कि वो हमारे मोकामा के प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी के समर्थन में थे.’
हालांकि किशोर ने इस हत्या की निंदा की और राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि ‘ये हत्या दिखाता है कि जिस बिहार में जंगलराज की बात होती थी, बाहर बात होती थी कि चुनाव के दौरान बड़े पैमाने पर हिंसा होती है, ये हत्या उसी को दर्शाता है.’
किशोर ने अपने बयान में यहां तक कहा कि ‘जनसुराज हमेशा से कहता आया है कि गलत के साथ रहिएगा तो गलत ही होगा. बाहुबली किसी भी जाति का हो, किसी समाज का हो, आपके गांव का हो, आपकी विचारधारा का हो, जो गलत है गलत है.’ उन्होंने यह भी कहा कि किसी की हत्या हो जाना ये सही नहीं है. वो आदमी सही है या गलत है, उसने क्या-क्या किया, वो बहस का मुद्दा हो सकता है लेकिन लोकतंत्र में हिंसा की जगह नहीं हो सकती है.’
गोली लगने से नहीं हुई मौत?
इस बीच, शुक्रवार रात को आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने इस मामले में नया मोड़ ला दिया है. रिपोर्ट तैयार करने वाले चिकित्सकों ने खुलासा किया कि ‘दुलारचंद यादव की मौत गोली लगने से नहीं हुई थी. गोली उनके पैर में लगी थी, लेकिन वह घातक नहीं थी.’
चिकित्सकों ने बताया कि दुलारचंद के सीने पर गाड़ी चढ़ी थी ,जिससे सीने की हड्डी टूट गई और फेफड़े फट गये थे, जिससे उनकी मौत हुई. उन्होंने कहा –‘विस्तृत रिपोर्ट जल्द पुलिस को सौंपी जाएगी.’
क्या अनंत सिंह होंगे गिरफ्तार?
पटना (ग्रामीण) के पुलिस अधीक्षक ने बताया कि प्रारंभिक जांच में भी यही संकेत मिले हैं कि मौत का कारण गोली नहीं थी. उन्होंने कहा कि पुलिस तीन एफआईआर दर्ज कर चुकी है और अब तक दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है. हालांकि इस हत्याकांड के लिए अनंत सिंह को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है. पीड़ित परिवार उनकी गिरफ्तारी की मांग भी कर रहा है.
मोकामा हत्याकांड अब राजनीतिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर सुर्खियों में है. विपक्ष इस हत्याकांड के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहरा रहा है.
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