बांग्लादेश में इस समय हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं। देश में हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है और यूनुस सरकार पर भी स्थिति को नियंत्रित करने में नाकाम रहने के आरोप लग रहे हैं। इस बीच हिंदू समुदाय को लगातार निशाना बनाए जाने की घटनाएं भी सामने आ रही हैं।
हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता के साथ-साथ बांग्लादेश एक और गंभीर संकट से जूझ रहा है, जो सीधे जनस्वास्थ्य से जुड़ा है। देश में कंडोम की भारी किल्लत देखी जा रही है, जिसका असर परिवार नियोजन कार्यक्रमों पर साफ नजर आ रहा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि लाखों लोग गर्भनिरोधक साधनों से वंचित हो सकते हैं। यदि समय रहते स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो इसके दूरगामी और गंभीर सामाजिक प्रभाव पड़ सकते हैं।
कंडोम की कमी का सीधा असर कीमतों पर भी पड़ा है। लोकल और प्रीमियम दोनों तरह के कंडोम के दाम तेजी से बढ़ गए हैं और आम लोगों की पहुंच से बाहर होते जा रहे हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बांग्लादेश में कंडोम का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात किया जाता है, और मौजूदा हालात में आपूर्ति बाधित होने से संकट और गहरा गया है।
नेशनल कॉन्ट्रासेप्टिव समरी रिपोर्ट के ताज़ा आंकड़े गंभीर चिंता पैदा करने वाले हैं। बीते छह वर्षों में कंडोम की आपूर्ति में करीब 57 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है।
हालात अन्य गर्भनिरोधक साधनों के मामले में और भी खराब हैं। ओरल पिल्स की उपलब्धता 63 प्रतिशत, आईयूडी की 64 प्रतिशत, इंजेक्टेबल गर्भनिरोधकों की 41 प्रतिशत और इम्प्लांट की आपूर्ति में 37 प्रतिशत तक की कमी आई है।
रिपोर्ट के मुताबिक 11 दिसंबर 2025 तक महानिदेशालय परिवार नियोजन (DGFP) के पास कंडोम का स्टॉक केवल 39 दिनों, इम्प्लांट का 33 दिनों और आईयूडी का महज 45 दिनों के लिए ही शेष था।
ओरल पिल्स और इंजेक्टेबल गर्भनिरोधकों का भंडार अभी कुछ महीनों तक चल सकता है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि इनका स्टॉक भी तेज़ी से घट रहा है और आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है।