नई दिल्ली: होर्मुज जलमार्ग को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत निर्णायक दौर में पहुंच चुकी है, लेकिन समझौते पर अब भी अंतिम सहमति नहीं बन सकी है। इस बीच अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बातचीत में आ रही चुनौतियों पर खुलकर बयान दिया है। उनका कहना है कि प्रक्रिया बेहद जटिल है और दोनों देशों के बीच मतभेदों को सुलझाने में अभी समय लगेगा।
बताया जा रहा है कि ओमान की मध्यस्थता में दोनों देशों के बीच वार्ता जारी है। वहीं, ईरान का दावा है कि होर्मुज जलमार्ग से जुड़े समझौते का मसौदा अंतिम चरण में पहुंच चुका है। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी संकेत दिया है कि आने वाले कुछ दिनों में इस दिशा में बड़ी प्रगति देखने को मिल सकती है।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने एक साक्षात्कार में कहा कि हालिया प्रगति के बावजूद ईरान के साथ बातचीत अभी भी आसान नहीं है। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलमार्ग को फिर से खोलने की दिशा में बातचीत आगे बढ़ रही है, लेकिन कई जटिल मुद्दों पर अभी भी सहमति बननी बाकी है।
उन्होंने कहा कि बातचीत की प्रक्रिया में कई बार आगे बढ़ने के बाद पीछे भी लौटना पड़ता है। उनके मुताबिक, यही कारण है कि समझौते में अपेक्षा से अधिक समय लग रहा है।
जेडी वेंस ने बातचीत में आ रही कठिनाइयों के लिए ईरान के नेतृत्व के भीतर मौजूद अलग-अलग विचारों का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, ईरान में कुछ लोग तनाव खत्म करना चाहते हैं, जबकि कट्टरपंथी धड़ा टकराव जारी रखने के पक्ष में है।
उन्होंने कहा कि अमेरिकी प्रशासन का उद्देश्य ऐसी परिस्थितियों में भी ऐसा समाधान निकालना है जो अमेरिका के हित में हो। साथ ही उन्होंने विश्वास जताया कि अंततः ऐसा समझौता होगा जिससे तेल की कीमतों पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा और ईरान परमाणु हथियार हासिल नहीं कर सकेगा।
ईरान ने भी संकेत दिए हैं कि होर्मुज जलमार्ग को लेकर समझौता अंतिम चरण में पहुंच गया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि यदि प्रक्रिया में कोई बाधा नहीं आती है तो जल्द ही संयुक्त बयान जारी किया जा सकता है।
सूत्रों के अनुसार, ईरान और ओमान के वार्ताकार समझौते का मसौदा तैयार कर चुके हैं और अब अंतिम मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है। माना जा रहा है कि यह समझौता जलमार्ग को लेकर जारी विवाद को फिलहाल शांत करने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी हालिया प्रगति पर सकारात्मक संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि समझौते को लेकर पर्याप्त प्रगति हुई है और इसकी घोषणा जल्द हो सकती है।
हालांकि, रिपोर्टों के मुताबिक समझौते की राह में सबसे बड़ी चुनौती ईरान के बंदरगाहों पर लगी नाकेबंदी और होर्मुज जलमार्ग पर नियंत्रण का मुद्दा बना हुआ है। ट्रंप प्रशासन पहले ही ऐसे किसी भी समझौते से इनकार कर चुका है जिससे जलमार्ग पर ईरान की पकड़ मजबूत हो, जबकि ईरान लंबे समय से इस क्षेत्र में अपने प्रभाव को बनाए रखने की बात करता रहा है।
होर्मुज जलमार्ग को लेकर बढ़े तनाव और जहाजों पर हमलों की घटनाओं के चलते समुद्री यातायात गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है। इसका असर अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति पर पड़ा है, जिससे दुनिया के कई देशों में ईंधन और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समझौता होता है तो वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को बड़ी राहत मिल सकती है।
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