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Iran-US War: ईरान की नई धमकी से बढ़ा तनाव, IRGC बोला- अगला हमला हुआ तो बदल जाएगा जंग का पूरा नक्शा

ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्य टकराव के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि अगर वॉशिंगटन ने दोबारा सैन्य कार्रवाई शुरू की, तो तेहरान इस बार बदली हुई रणनीति के साथ जवाब देगा। IRGC के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल हुसैन मोहेब्बी ने कहा है कि अगले चरण में युद्ध का भूगोल, इस्तेमाल होने वाले हथियार और निशाने तीनों बदल सकते हैं।

IRGC की अमेरिका को सीधी चेतावनी

IRGC प्रवक्ता हुसैन मोहेब्बी के मुताबिक ईरान ने ऐसे हथियार और सैन्य क्षमताएं तैयार की हैं, जिनका इस्तेमाल संघर्ष के पिछले चरणों में नहीं किया गया था। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका ने फिर हमला किया तो ईरान नए हथियारों के साथ जवाब देगा और ऐसे ठिकानों को भी निशाना बनाया जा सकता है, जिन्हें पहले हमले में टारगेट नहीं किया गया था।

मोहेब्बी ने यह भी कहा कि ईरान लंबे संघर्ष के लिए तैयार है। उनके मुताबिक मौजूदा युद्ध ईरान की नजर में खत्म नहीं हुआ है, बल्कि अलग-अलग चरणों में जारी है। हालांकि ये दावे ईरानी पक्ष के हैं और इनके सभी सैन्य विवरणों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

नए हमले की आशंका क्यों बढ़ी?

IRGC की ताजा चेतावनी ऐसे समय आई है जब ईरानी अधिकारियों की ओर से अमेरिका की संभावित नई सैन्य कार्रवाई को लेकर लगातार बयान दिए जा रहे हैं। तेहरान का दावा है कि उसे अमेरिकी तैयारियों से जुड़े खुफिया इनपुट मिले हैं।

इसी बीच दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव के साथ-साथ बातचीत की कोशिशें भी जारी हैं। ईरान ने कतर के जरिए अमेरिका तक बातचीत शुरू करने के लिए सात शर्तें पहुंचाने की बात कही है। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसिन रेजई के मुताबिक कतर ने तेहरान की शर्तें वॉशिंगटन तक पहुंचाई हैं।

ईरान की 7 शर्तें, लेकिन तीन ही सार्वजनिक

ईरान ने अपनी सभी सात शर्तों को सार्वजनिक नहीं किया है। हालांकि मोहसिन रेजई ने युद्ध खत्म करने से जुड़ी तीन प्रमुख मांगों का खुलासा किया है

  • सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई और युद्ध समाप्त किया जाए
  • विदेशों में फ्रीज किए गए ईरान के फंड जारी किए जाएं
  • अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकाबंदी खत्म करे

तेहरान का कहना है कि इन शर्तों पर सहमति बनने के बाद बातचीत का रास्ता खुल सकता है। वहीं ईरानी अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि शर्तें नहीं मानी गईं तो सैन्य विकल्प के लिए तैयारी जारी रहेगी।

अमेरिका के हथियार भंडार पर भी उठे सवाल

ईरान-अमेरिका संघर्ष का एक दूसरा अहम पहलू अमेरिकी हथियार भंडार से जुड़ा है। एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक 28 फरवरी से शुरू हुए सैन्य अभियान के दौरान अमेरिका ने 22 अरब डॉलर से ज्यादा के गोला-बारूद का इस्तेमाल किया। इससे कुछ महत्वपूर्ण हथियार प्रणालियों के स्टॉक और उत्पादन क्षमता पर दबाव बढ़ने की बात सामने आई है।

रिपोर्ट में अमेरिकी हथियारों की सप्लाई और दोबारा भंडार भरने की क्षमता को लेकर चुनौतियों का भी जिक्र है। हालांकि इसे अमेरिका के पास हथियार पूरी तरह खत्म होने के रूप में देखना सही नहीं होगा। मुद्दा मुख्य रूप से कुछ महंगे मिसाइल और इंटरसेप्टर सिस्टम के स्टॉक को तेजी से दोबारा भरने की चुनौती का है।

जंग के बीच बातचीत का रास्ता भी खुला

दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ ईरान नए अमेरिकी हमले की स्थिति में जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दे रहा है, तो दूसरी तरफ कतर के जरिए बातचीत के रास्ते खुले हुए हैं। ईरान ने अपनी शर्तें अमेरिका तक पहुंचाई हैं और वॉशिंगटन के जवाब का इंतजार करने की बात कही है।

वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरान के साथ संभावित बातचीत के संकेत दिए हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि दोनों पक्ष सैन्य टकराव को आगे बढ़ाते हैं या कूटनीतिक रास्ते पर लौटने की कोशिश करते हैं।

क्यों अहम है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?

इस पूरे संकट में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सबसे महत्वपूर्ण मोर्चों में से एक बना हुआ है। ईरान की ओर से इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर दबाव और अमेरिका की ओर से इसे खुला रखने की कोशिश ने संघर्ष को केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहने दिया है।

होर्मुज से गुजरने वाले ऊर्जा कारोबार पर किसी भी बड़े व्यवधान का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर पड़ सकता है। हाल की रिपोर्टों में कूटनीतिक प्रगति की उम्मीद के बीच तेल कीमतों में गिरावट भी दर्ज की गई है।फिलहाल तस्वीर दो समानांतर रास्तों की है। एक तरफ ईरान नए अमेरिकी हमले की स्थिति में नए हथियारों और नए निशानों के साथ जवाब देने की चेतावनी दे रहा है, वहीं दूसरी तरफ बातचीत के लिए अपनी शर्तें अमेरिका तक पहुंचा चुका है।

यानी वॉशिंगटन और तेहरान के बीच अगला कदम सिर्फ सैन्य मोर्चे पर नहीं, बल्कि कूटनीतिक मेज पर भी तय हो सकता है। आने वाले दिनों में अमेरिका का जवाब और होर्मुज को लेकर स्थिति इस संघर्ष की अगली दिशा के लिए अहम होगी।

news desk

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