अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के संचालन और प्रशासन को नई दिशा देने के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति प्रक्रिया अब निर्णायक दौर में पहुंच गई है। देशभर से मिले 5,585 आवेदनों की लंबी प्रक्रिया के बाद अब सिर्फ 16 उम्मीदवार अंतिम चरण तक पहुंचे हैं। चयन समिति इन उम्मीदवारों के मूल्यांकन के बाद तीन नामों का पैनल तैयार करेगी, जिसे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सामने रखा जाएगा। 2 सितंबर को होने वाली ट्रस्ट की बैठक में इनमें से एक नाम पर अंतिम मुहर लगने की उम्मीद है।
राम मंदिर के पहले पूर्णकालिक CEO के चयन के लिए शुरू की गई प्रक्रिया में देशभर से 5,585 आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें से 3,877 उम्मीदवारों ने विस्तृत बायोडाटा जमा किया। इसके बाद 1,580 आवेदनों का गहन मूल्यांकन किया गया और करीब 111 उम्मीदवारों के ऑनलाइन साक्षात्कार लिए गए।
ऑनलाइन प्रक्रिया के बाद अंतिम चरण के लिए 16 उम्मीदवारों को अयोध्या बुलाया गया। इन सभी का आमने-सामने साक्षात्कार लिया गया, जिसमें प्रशासनिक क्षमता के साथ नेतृत्व, रणनीतिक सोच, तकनीकी समझ, व्यक्तित्व और प्रबंधन कौशल को परखा गया।
CEO पद के लिए अंतिम चयन से पहले तीन सबसे योग्य उम्मीदवारों के नामों का पैनल तैयार किया जाएगा। यह पैनल श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंपा जाएगा। इसके बाद अंतिम फैसला ट्रस्ट की ओर से लिया जाएगा।
चयन समिति में सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) वीके चतुर्वेदी और परमाणु वैज्ञानिक डॉ. सुरेश हावरे शामिल हैं। समिति में न्यायपालिका, रक्षा और वैज्ञानिक क्षेत्र का अनुभव रखने वाले सदस्य शामिल हैं।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की 2 सितंबर को अहम बैठक प्रस्तावित है। इसी बैठक में तीन नामों के पैनल पर चर्चा के बाद CEO के नाम को मंजूरी दिए जाने की संभावना है। CEO की नियुक्ति के साथ मंदिर के प्रवक्ता और अन्य प्रशासनिक व्यवस्थाओं से जुड़े मुद्दों पर भी बैठक में चर्चा हो सकती है।
मंदिर परिसर की प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए यह नियुक्ति बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। नए CEO के जिम्मे मंदिर के प्रशासन से लेकर श्रद्धालुओं की सुविधाओं और अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय तक कई अहम जिम्मेदारियां होंगी।
नियुक्त होने वाले CEO को मंदिर परिसर की समग्र प्रशासनिक निगरानी करनी होगी। इसके अलावा श्रद्धालुओं की व्यवस्थाओं को सुचारु रखना, अलग-अलग विभागों के बीच तालमेल बनाना और ट्रस्ट के फैसलों को प्रभावी तरीके से लागू करना भी उनकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल होगा।
हाल में ट्रस्ट की ओर से किए गए प्रशासनिक पुनर्गठन और विभागों के बंटवारे के बाद इस पद की अहमियत और बढ़ गई है। मंदिर में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए प्रशासनिक स्तर पर मजबूत नेतृत्व की जरूरत भी महसूस की जा रही है।
अंतिम चरण के साक्षात्कार में उम्मीदवारों की परख केवल उनकी शैक्षिक योग्यता और प्रशासनिक अनुभव तक सीमित नहीं रही। उनसे राम मंदिर की व्यवस्थाओं, श्रद्धालुओं की सुविधा, भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा और भविष्य की चुनौतियों से जुड़े सवाल भी किए गए।
उम्मीदवारों से यह भी पूछा गया कि अगर एक दिन में पांच लाख श्रद्धालु मंदिर पहुंच जाएं तो ऐसी स्थिति में भीड़ को किस तरह नियंत्रित किया जाएगा। दर्शन व्यवस्था को बेहतर बनाने, सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधा के बीच संतुलन कायम करने तथा अधिकारियों और कर्मचारियों के व्यवहार को लेकर भी उनकी राय जानी गई।
साक्षात्कार के दौरान उम्मीदवारों की धार्मिक आस्था और व्यक्तिगत जीवनशैली से जुड़े सवाल भी पूछे गए। उनसे यह जानने की कोशिश की गई कि वे खुद को कट्टर हिंदू मानते हैं या सामान्य आस्था रखते हैं। इसके अलावा मांसाहार, शिखा और जनेऊ धारण करने तथा धार्मिक और सामाजिक संगठनों से जुड़े होने के बारे में भी सवाल किए गए।
उम्मीदवारों से राम मंदिर की मौजूदा व्यवस्थाओं, मंदिर से जुड़ी उनकी जानकारी और भविष्य में आने वाली चुनौतियों पर भी विचार मांगे गए। उनसे यह भी पूछा गया कि मंदिर के विकास के लिए उनका विजन क्या होगा और वे अपनी जिम्मेदारी संभालने के बाद किस तरह की कार्ययोजना तैयार करेंगे।
चयन समिति ने यह भी जानने की कोशिश की कि किसी आपात स्थिति में उम्मीदवार कितनी तेजी से फैसला ले सकते हैं। इसके साथ ही सरकारी एजेंसियों, सुरक्षा बलों और मंदिर प्रशासन के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित करने की उनकी क्षमता को भी परखा गया।
उम्मीदवारों से उनकी विशेष उपलब्धियों और अब तक के पेशेवर अनुभव के बारे में भी जानकारी ली गई। यानी CEO पद की चयन प्रक्रिया में प्रशासनिक अनुभव के साथ नेतृत्व क्षमता, आस्था, भीड़ प्रबंधन, निर्णय लेने की क्षमता और मंदिर के भविष्य को लेकर सोच जैसे कई पहलुओं को शामिल किया गया है।
अयोध्या में अंतिम चरण के साक्षात्कार पूरे होने के बाद अब चयन समिति 16 उम्मीदवारों के प्रदर्शन का अंतिम मूल्यांकन करेगी। इसके आधार पर तीन नामों का पैनल तैयार कर ट्रस्ट को सौंपा जाएगा। इसके बाद 2 सितंबर की बैठक में तय होगा कि राम मंदिर के पहले पूर्णकालिक CEO की जिम्मेदारी किसे दी जाएगी।
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