कहते हैं कि क्रिकेट में ‘अगर’ और ‘मगर’ नहीं चलते. जब आप जीतते हैं, तो सारी नाकामियां एक तरफ हो जाती हैं और केवल जीत की बात होती है.लेकिन जब आपके सितारे गर्दिश में चलने लगते हैं, तो आपकी उलटी गिनती शुरू हो जाती है और आपकी हर एक नाकामी नोट की जाती है. शायद यही कहानी गौतम गंभीर और अगरकर पर पूरी तरह फिट बैठती है.
टीम इंडिया के चीफ कोच अपनी मनमानी के चलते टीम को लगातार गर्त में धकेलते हुए नजऱ आ रहे हैं. इतना ही नहीं, गंभीर को अगरकर का भी पूरा साथ मिल रहा है.
इसका नतीजा ये हुआ कि अपने ही घरेलू मैदान पर टीम इंडिया सबसे ज़्यादा फिसड्डी साबित होती दिखी. कीवियों ने सबसे पहले भारत को शिकार बनाते हुए भारतीय टीम को घर में ही 3-0 से हराया. भारत की यह पराजय किसी के गले नहीं उतर रही, क्योंकि भारतीय टीम अपने ही मैदान पर हमेशा शेर साबित होती आई है.
अब दक्षिण अफ्रीका ने भी टीम इंडिया को उसी के मैदान पर मात दे दी है. साउथ अफ्रीका ने भारत को गुवाहाटी टेस्ट में 408 रनों से हराया है.टेस्ट में मिली अबतक की सबसे बड़ी हार है. गौर करने वाली बात यह है कि यही दक्षिण अफ्रीकी टीम पाकिस्तान से पहला टेस्ट हारकर आई थी.हालांकि उन्होंने दूसरा मैच जीतकर सीरीज़ बचा ली, लेकिन भारतीय टीम दोनों मुकाबलों में पराजित हो गई और अब 0–2 से हार झेल रही है.
90 के दशक में मोहम्मद अजहरुद्दीन ने अपनी कप्तानी में भारतीय पिचों का शानदार लाभ उठाते हुए इंग्लैंड के साथ-साथ ऑस्ट्रेलिया जैसी मज़बूत टीमों को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था. उसके बाद सचिन, गांगुली और द्रविड़ जैसे कप्तानों ने भी घरेलू पिचों पर अपना दबदबा बनाए रखा, लेकिन मौजूदा टीम के कोच गौतम गंभीर अपने हिसाब से टीम चला रहे हैं. गंभीर और अगरकर की जोड़ी के गलत फैसलों की कीमत टीम इंडिया को भारी पड़ रही है. चीफ कोच और चीफ सेलेक्टर की यह जोड़ी भारतीय टीम को आगे ले जाने के बजाय पीछे ढकेलती दिखाई दे रही है.
उनके निर्णय लगातार टीम को नुकसान पहुँचा रहे हैं। नए-नए बेतुके प्रयोगों की भेंट टीम चढ़ रही है। टीम चयन विवादों में है.चाहे बल्लेबाज़ हों या गेंदबाज़, सभी के चयन और बैटिंग ऑर्डर पर सवाल उठ रहे हैं. रोहित और विराट को टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने की ओर धकेलना भी इसी में शामिल है, जबकि मोहम्मद शमी जैसा प्रदर्शनकारी गेंदबाज़ लगातार बाहर बैठा हुआ है। इसका जवाब न गंभीर के पास है, न अगरकर के पास.
कुल मिलाकर घरेलू पिचों पर इस तरह की शर्मनाक हारों ने क्रिकेट फैंस को बेहद परेशान कर दिया है. ऐसे में यदि बीसीसीआई जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाती, तो आने वाले समय में टीम इंडिया टेस्ट क्रिकेट में वेस्टइंडीज की राह पर चली जा सकती है.
टेस्ट में भारत की सबसे बड़ी हार
408 रन बनाम SA (गुवाहाटी, 2025)*
342 रन बनाम AUS (नागपुर, 2004)
341 रन बनाम PAK (कराची, 2006)
337 रन बनाम AUS (मेलबर्न, 2007)
333 रन बनाम AUS (पुणे, 2017)