दिल्ली का ऐतिहासिक जंतर-मंतर अब धरना-प्रदर्शनों का प्रमुख केंद्र नहीं रहेगा। कई वर्षों तक देशभर के आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों का गवाह रहे इस स्थल को दिल्ली पुलिस ने अक्टूबर में आधिकारिक धरना स्थलों की सूची से हटा दिया था। इसके बाद अब यहां से सुरक्षा व्यवस्था के तहत लगाई गई कई लेयर की बैरिकेडिंग, पैरामिलिट्री फोर्स, QRT और एंटी-राइट व्हीकल भी हटाए जा रहे हैं। साथ ही, सड़क को आम जनता और ट्रैफिक के लिए खोल दिया गया है। इस फैसले के बाद जंतर-मंतर के ऐतिहासिक विरोध प्रदर्शन स्थल के रूप में भविष्य को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
साल 1993 में जंतर-मंतर को आधिकारिक तौर पर प्रमुख धरना स्थल के रूप में नोटिफाई किया गया था। तब से लेकर आज तक, यह जगह देश के कोने-कोने से आने वाले किसानों, कर्मचारियों, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों के आक्रोश और उम्मीदों का केंद्र रही है।
सत्ता के केंद्र के इतने करीब स्थित होने के कारण सालों तक यह जगह विरोध दर्ज कराने का सबसे प्रमुख और सुरक्षित ठिकाना बनी रही, जहां छोटे समूहों से लेकर देश को हिला देने वाले बड़े-बड़े आंदोलन तक देखे गए।
हाल के दिनों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हुए प्रदर्शनों और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) तथा अन्य संगठनों द्वारा चुनावी प्रक्रिया को लेकर किए गए विरोध के बाद हालात तल्ख हो गए थे। अक्टूबर के शुरुआती हफ्तों में प्रदर्शनकारियों और दिल्ली पुलिस के बीच हुए टकराव के बाद राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई थी।
इसी विवाद और गृह मंत्रालय की समिति की सिफारिशों के आधार पर आखिरकार 11 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने ऐतिहासिक कदम उठाते हुए जंतर-मंतर को आधिकारिक धरना-प्रदर्शन स्थलों की सूची से हमेशा के लिए हटा दिया।
जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन धरनों और प्रदर्शनों का दौर खत्म होने के बाद दिल्ली पुलिस ने संगठनों और नागरिकों के विरोध प्रदर्शन के लिए तीन नए वैकल्पिक स्थल निर्धारित किए हैं। अब से विरोध प्रदर्शन के लिए इन तय स्थानों पर अनुमति लेनी होगी:
लंबे समय तक सुरक्षा प्रतिबंधों, मल्टी-लेयर बैरिकेडिंग और भारी पुलिस बल की तैनाती के कारण इस प्रमुख सड़क पर आम यातायात और वाहन चालकों की आवाजाही भारी रूप से प्रभावित रहती थी। अब धरना स्थल का दर्जा खत्म होने के साथ ही मौके से सुरक्षा घेरा और बैरिकेड्स हटाए जा रहे हैं, जिससे जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों से गुजरने वाले आम लोगों और वाहन चालकों को बड़ी राहत मिली है।
सालों पुराना वह अध्याय अब बंद हो चुका है, जहां लोग सत्ता के ठीक सामने अपनी आवाज बुलंद किया करते थे। हालांकि, जंतर-मंतर के इस बदलाव ने राजधानी में विरोध प्रदर्शनों के तौर-तरीकों को पूरी तरह से बदलकर रख दिया है।
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