नई दिल्ली: भाई-बहन के अटूट प्रेम, विश्वास और स्नेह का प्रतीक रक्षाबंधन का पर्व हर वर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उसकी लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य की कामना करती हैं, जबकि भाई जीवनभर उनकी रक्षा का संकल्प लेते हैं। ऐसे में यदि आपके मन में रक्षाबंधन 2026 की सही तारीख, शुभ मुहूर्त और भद्रा को लेकर कोई भ्रम है, तो यहां जानिए पूरी जानकारी।
वैदिक पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा। पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 27 अगस्त सुबह 9 बजकर 9 मिनट से होगी और इसका समापन 28 अगस्त सुबह 9 बजकर 49 मिनट पर होगा।
चूंकि रक्षाबंधन का पर्व उदयातिथि के आधार पर मनाया जाता है, इसलिए इस वर्ष यह त्योहार 28 अगस्त को ही मनाया जाएगा।
पंचांग के अनुसार, 28 अगस्त को उदयकाल में पूर्णिमा तिथि रहेगी और इस दिन भद्रा का कोई बाधक प्रभाव नहीं माना जा रहा है। ऐसे में बहनें शुभ समय में बिना किसी संकोच के अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकती हैं। हालांकि, अंतिम मुहूर्त की पुष्टि के लिए स्थानीय पंचांग या अपने क्षेत्र के विद्वान आचार्य से सलाह लेना उचित रहेगा।
रक्षाबंधन के दिन सबसे पहले भगवान की पूजा की जाती है। इसके बाद पूजा की थाली में रोली, चंदन, अक्षत, राखी, घी का दीपक और मिठाई सजाई जाती है।
फिर भाई के माथे पर तिलक लगाया जाता है, अक्षत अर्पित किए जाते हैं और उसकी कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा जाता है। इसके बाद भाई को मिठाई खिलाई जाती है। बदले में भाई अपनी बहन को उपहार देकर उसकी रक्षा का वचन देता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन अपने इष्टदेव को भी रक्षा सूत्र अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, राखी बांधते समय इस वैदिक मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है—
“ॐ येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।”
मान्यता है कि यह मंत्र भाई की रक्षा, सुख, समृद्धि और दीर्घायु की कामना का प्रतीक है।
रक्षाबंधन केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में विश्वास, सम्मान और रिश्तों की मर्यादा का प्रतीक भी माना जाता है। इतिहास में इससे जुड़े कई प्रसिद्ध प्रसंग मिलते हैं।
मान्यता है कि मेवाड़ की महारानी कर्मावती ने संकट के समय मुगल सम्राट हुमायूं को राखी भेजकर सहायता मांगी थी और हुमायूं ने उस रक्षा सूत्र का सम्मान करते हुए उनकी रक्षा का प्रयास किया।
एक अन्य लोकप्रिय कथा के अनुसार, सिकंदर की पत्नी ने राजा पुरू को राखी बांधकर उन्हें अपना भाई माना था। कहा जाता है कि युद्ध के दौरान राजा पुरू ने उसी रिश्ते का सम्मान करते हुए सिकंदर का वध नहीं किया।
इतिहास में महाराजा राजसिंह द्वारा रूपनगर की राजकुमारी की रक्षा के लिए संघर्ष करने का भी उल्लेख मिलता है। वहीं महाभारत में भी रक्षा सूत्र और भाई-बहन के स्नेह से जुड़े कई प्रसंग इस पर्व के महत्व को दर्शाते हैं।
रक्षाबंधन केवल एक धागा बांधने की परंपरा नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास, सम्मान और आजीवन साथ निभाने का पवित्र संकल्प है। यही वजह है कि यह पर्व सदियों से भारतीय संस्कृति की सबसे महत्वपूर्ण और भावनात्मक परंपराओं में शामिल है। भाई-बहन के रिश्ते को और मजबूत बनाने वाला यह त्योहार हर वर्ष पूरे देश में श्रद्धा, उल्लास और उत्साह के साथ मनाया जाता है।
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