नई दिल्ली: साल 2026 में देवशयनी एकादशी के साथ ही चातुर्मास की शुरुआत होने जा रही है। हिंदू धर्म में इस अवधि का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। मान्यता है कि देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु चार महीने के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं। इसी कारण इस दौरान विवाह, मुंडन, जनेऊ और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। चातुर्मास को पूजा-पाठ, व्रत, साधना और आध्यात्मिक चिंतन के लिए सबसे शुभ समय माना जाता है।
2026 में कब से शुरू होगा चातुर्मास?
धार्मिक पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में देवशयनी एकादशी 25 जुलाई, शनिवार को मनाई जाएगी। इसी दिन से चातुर्मास का आरंभ होगा। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में योग निद्रा में प्रवेश करते हैं और अगले चार महीने तक विश्राम करते हैं।
चातुर्मास में क्यों नहीं होते शादी-विवाह?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान विष्णु योग निद्रा में रहते हैं, तब विवाह, मुंडन, जनेऊ और अन्य शुभ संस्कारों का आयोजन नहीं किया जाता। माना जाता है कि इस दौरान किए गए मांगलिक कार्यों को भगवान का पूर्ण आशीर्वाद प्राप्त नहीं होता। इसलिए इन चार महीनों में लोग धार्मिक अनुष्ठान, व्रत, दान, जप, तप और भक्ति पर अधिक ध्यान देते हैं।
वैज्ञानिक नजरिए से भी है खास वजह
चातुर्मास वर्षा ऋतु में आता है। प्राचीन समय में भारी बारिश के कारण यात्रा और आवागमन कठिन हो जाता था। ऐसे में बड़े सामाजिक आयोजन करना आसान नहीं होता था। इसी वजह से विवाह जैसे समारोहों को टालने की परंपरा विकसित हुई। इस दौरान साधु-संत भी एक ही स्थान पर रहकर साधना, भजन और प्रवचन करते थे।
2026 में कब फिर शुरू होंगे शादी के मुहूर्त?
देवशयनी एकादशी के साथ 25 जुलाई 2026 से विवाह के शुभ मुहूर्त बंद हो जाएंगे। इसके बाद करीब चार महीने तक मांगलिक कार्य नहीं किए जाएंगे। वर्ष 2026 में देवउठनी एकादशी 20 नवंबर को पड़ेगी। इसी दिन भगवान विष्णु के जागरण के साथ एक बार फिर विवाह और अन्य शुभ कार्यों के मुहूर्त शुरू हो जाएंगे।
चातुर्मास में किस तीर्थ का विशेष महत्व माना जाता है?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, चातुर्मास के दौरान ब्रजभूमि का विशेष महत्व बताया गया है। कहा जाता है कि इस अवधि में ब्रज के दर्शन और तीर्थ यात्रा का पुण्य कई प्रमुख तीर्थों के बराबर माना जाता है। इसलिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस समय ब्रज क्षेत्र में दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।