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नहीं रहे दिग्गज फिल्ममेकर भारतीराजा: सिनेमा के उस ‘आइकन’ का सफर, जिसने रजनी-कमल-श्रीदेवी की तिकड़ी से रचा था इतिहास

साउथ सिनेमा से आज एक बेहद दुखद और स्तब्ध करने वाली खबर सामने आई है। भारतीय सिनेमा के सबसे प्रभावशाली निर्देशकों में से एक, भारतीराजा (Bharathiraja) का 84 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। चेन्नई के एक निजी अस्पताल में लंबे समय से बीमार चल रहे इस महान फिल्ममेकर ने बुधवार, 10 जून 2026 की सुबह अंतिम सांस ली।

यह क्षति न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे भारतीय फिल्म जगत और उनके करोड़ों फैंस के लिए एक गहरा सदमा है।

पिछले साल ही टूटा था दुखों का पहाड़: बेटे को खोने का गम

भारतीराजा के लिए पिछला साल (2025) बेहद दर्दनाक रहा था। अभी पिछले साल ही उन्होंने अपने 48 वर्षीय बेटे मनोज भारतीराजा को हमेशा के लिए खो दिया था, जिनका निधन दिल का दौरा पड़ने से हुआ था। बेटे के जाने के गम और बढ़ती बीमारी से जूझते हुए आखिरकार इस महान निर्देशक ने भी आज दुनिया को अलविदा कह दिया।

’16 वयथिनिले’: जब एक ही फिल्म से मिले भारतीय सिनेमा के 3 सुपरस्टार्स

भारतीराजा के सिनेमाई सफर की शुरुआत किसी चमत्कार से कम नहीं थी। साल 1977 में उन्होंने तमिल फिल्म ’16 वयथिनिले’ से बतौर निर्देशक कदम रखा था। इस इकलौती फिल्म ने भारतीय सिनेमा को वह त्रिमूर्ति दी, जिसने आगे चलकर दशकों तक राज किया:

  1. कमल हासन
  2. रजनीकांत
  3. श्रीदेवी

बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर अपने करियर की शुरुआत करने वाले भारतीराजा ने कन्नड़ प्रोड्यूसर पुट्टन्ना कनागल, पी. पुल्लैया और एम. कृष्णन नायर जैसे दिग्गजों के साथ काम सीखकर खुद को तराशा था।

‘सिर्फ गांवों की फिल्में बनाने’ का लगा आरोप, तो वेस्टर्न स्टाइल से दिया जवाब

भारतीराजा की शुरुआती फिल्मों में ग्रामीण परिवेश की इतनी खूबसूरत झलक होती थी कि आलोचकों ने उन पर ‘सिर्फ गांवों के लिए फिल्में बनाने’ का ठप्पा लगा दिया। लेकिन, इस मास्टर डायरेक्टर ने हार मानने के बजाय अपने आलोचकों को चौंकाने का फैसला किया।

उन्होंने ‘सिगप्पू रोजक्कल’ बनाई, जो एक साइकोपैथ थ्रिलर थी। महिलाओं से नफरत करने वाले एक किरदार पर आधारित यह फिल्म पूरी तरह वेस्टर्न स्टाइल और अर्बन बैकड्रॉप पर बनी थी। इसके बाद उन्होंने एक्शन जॉनर में भी हाथ आजमाया और साबित किया कि वे हर तरह के सिनेमा के उस्ताद हैं।

नेशनल अवॉर्ड्स और शानदार क्रेडेंशियल्स

भारतीराजा सिर्फ तमिल तक सीमित नहीं रहे, उन्होंने तेलुगु और हिंदी सिनेमा में भी कई क्लासिक फिल्में दीं। उनकी बेहतरीन कला का अंदाजा आप उनके नाम दर्ज इन पुरस्कारों से लगा सकते हैं:

पुरस्कार का नामसंख्या/विशेषता
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (National Film Awards)6 (पहला अवॉर्ड तेलुगु फिल्म Seethakoka Chilaka के लिए मिला)
साउथ फिल्मफेयर अवॉर्ड्स4
तमिलनाडु राज्य फिल्म पुरस्कार6
नंदी पुरस्कार (तेलुगु सिनेमा)1

उनकी कुछ सबसे यादगार फिल्मों में ‘किलक्के पोगुम रेल’, ‘सिगप्पू रोजक्कल’, ‘अलाइगल ओइवथिल्लई’, ‘कादल ओवियम’ और ‘मुदल मरियाथाई’ शामिल हैं। तेलुगु में उन्होंने ‘आराधना’, ‘जमादग्नि’ और ‘टिक टिक टिक’ जैसी कल्ट फिल्में दीं।

एक युग का अंत

भारतीराजा का जाना सिनेमा के एक स्वर्णिम युग का अंत है। उन्होंने कैमरे के पीछे रहकर वो जादू बिखेरा जिसने आम भारतीय कहानियों को वैश्विक पहचान दिलाई। सिनेमा में उनके इस अतुलनीय योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। भावभीनी श्रद्धांजलि!

news desk

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