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उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान में एक दिवसीय संगोष्ठी का हुआ भव्य आयोजन, दिनकर, आचार्य शुक्ल सहित हिन्दी साहित्य की महान विभूतियों के योगदान को किया गया याद

उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान की ओर से 9 अक्टूबर दिन गुरुवार को हिन्दी भवन के निराला सभागार में एक दिवसीय संगोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया.यह संगोष्ठी श्रीनारायण चतुर्वेदी, रामधारी सिंह दिनकर, रामकुमार वर्मा, रामचन्द्र शुक्ल, श्याम नारायण पाण्डेय एवं कुँवर चन्द्र प्रकाश सिंह की स्मृति को समर्पित रही.कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 10:30 बजे दीप प्रज्वलन एवं माँ सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्प अर्पण के साथ हुआ.

कार्यक्रम से पहले दीप प्रज्वलित करते सदस्य

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान की प्रधान सम्पादक डॉ. अमिता दुबे ने सम्मानीय वक्ताओं पद्मश्री डॉ. विद्याविन्दु सिंह, साहित्यकार पद्मकांत शर्मा ‘प्रभात’, डॉ. राहुल पाण्डेय, डॉ. सूर्यप्रसाद दीक्षित, डॉ. रामकठिन सिंह एवं श्री शशि प्रकाश सिंह का स्वागत करते हुए स्मृति चिह्न एवं उत्तरीय भेंट कर सम्मानित किया.

अपने संबोधन में पद्मश्री डॉ. विद्याविन्दु सिंह ने श्रीनारायण चतुर्वेदी के संस्मरण साझा करते हुए कहा कि उनके सानिध्य में आने वाला हर व्यक्ति साहित्यकार बन जाता था. वहीं श्री पद्मकांत शर्मा ‘प्रभात’ ने दिनकर की कविताओं को अंग्रेज़ी शासन की क्रूरता के विरुद्ध तीखा प्रहार बताया और कहा कि उनकी रचनाओं में राष्ट्रवाद की चेतना मुखर रूप से व्यक्त होती है.

डॉ. राहुल पाण्डेय ने रामकुमार वर्मा को मयूरपंखी व्यक्तित्व बताते हुए कहा कि ‘उन्होंने कविता, नाटक, आलोचना सहित साहित्य की विविध विधाओं में योगदान दिया. उनकी कृतियों में भारतीय संस्कृति और राष्ट्रप्रेम की स्पष्ट झलक मिलती है.’
डॉ. सूर्यप्रसाद दीक्षित ने आचार्य रामचन्द्र शुक्ल की आलोचनात्मक दृष्टि और विशिष्ट निबंध शैली पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ‘उन्होंने कवि और समीक्षक के बीच सेतु का कार्य किया.’

संगोष्ठी के दौरान निर्मला देवी ने रामकुमार वर्मा की कृति ‘उत्तरायण’ से अंश प्रस्तुत किया, तनु मिश्रा ने दिनकर की प्रणभंग, सुकीर्ति तिवारी ने श्रीनारायण चतुर्वेदी के संस्मरण, जबकि अन्य साहित्यकारों द्वारा श्यामनारायण पाण्डेय, रामचन्द्र शुक्ल और कुँवर चन्द्र प्रकाश सिंह की रचनाओं का पाठ किया गया.

कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ. अमिता दुबे ने सभी साहित्यकारों, विद्वानों एवं मीडिया प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया. यह आयोजन हिन्दी साहित्य की महान विभूतियों के योगदान को याद करने और उनकी परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का एक महत्वपूर्ण अवसर बना.

news desk

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