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ईरान पर हमले की अटकलों के बीच अमेरिका की बड़ी सैन्य तैनाती, दो विमानवाहक पोत मध्य पूर्व रवाना

वाशिंगटन/ तेहरान: मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव चरम पर है। खबरें हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर सीमित सैन्य हमले के विकल्प पर विचार कर रहे हैं। इसी बीच अमेरिका ने अपनी सैन्य ताकत को तेजी से मध्य पूर्व की ओर बढ़ाना शुरू कर दिया है। हाल के दिनों में दो बड़े अमेरिकी विमानवाहक पोत – USS Abraham Lincoln और USS Gerald R. Ford – को इस क्षेत्र में भेजा गया है। इसे इराक युद्ध के बाद से अमेरिका की सबसे बड़ी सैन्य हलचल माना जा रहा है।

समुद्र में अमेरिकी ताकत का प्रदर्शन

USS Abraham Lincoln कैरियर स्ट्राइक ग्रुप जनवरी 2026 से अरब सागर में तैनात है। सैटेलाइट तस्वीरों के मुताबिक यह ओमान के तट के पास ऑपरेट कर रहा है, जो ईरान से ज्यादा दूर नहीं है। इस ग्रुप में F-35 और F/A-18 जैसे आधुनिक लड़ाकू विमान, मिसाइल विध्वंसक और क्रूजर शामिल हैं।

दूसरी ओर, दुनिया का सबसे बड़ा युद्धपोत USS Gerald R. Ford भी कैरिबियन से रवाना होकर भूमध्य सागर पहुंच चुका है और जल्द ही लिंकन ग्रुप से जुड़ सकता है। इस ग्रुप में इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर एयरक्राफ्ट, हेलीकॉप्टर स्क्वाड्रन और कई अन्य लड़ाकू इकाइयां शामिल हैं।

इसके अलावा अमेरिका ने B-52 बॉम्बर, अतिरिक्त F-15 लड़ाकू विमान और E-3 सेंट्री (AWACS) निगरानी विमान भी क्षेत्र में भेजे हैं। कुल मिलाकर यह 2003 के इराक युद्ध के बाद सबसे बड़ी अमेरिकी वायु और नौसैनिक मौजूदगी मानी जा रही है।

ट्रंप का रुख और बढ़ता दबाव

ट्रंप प्रशासन ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर नया समझौता चाहता है। ट्रंप ने हाल ही में कहा कि अगले 10 दिनों में साफ हो जाएगा कि डील संभव है या नहीं। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि अगर समझौता नहीं हुआ तो “हमें इसकी जरूरत पड़ेगी,” जिसे सैन्य कार्रवाई के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

पेंटागन का कहना है कि यह तैनाती “डिटरेंस” यानी दबाव बनाने के लिए है, लेकिन आधिकारिक तौर पर किसी हमले की पुष्टि नहीं की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि दो-दो एयरक्राफ्ट कैरियर की मौजूदगी अमेरिका को हमला करने की क्षमता देती है, लेकिन इससे बड़े और लंबे युद्ध का खतरा भी बढ़ सकता है।

दुनिया की नजरें मध्य पूर्व पर

ईरान ने इसे “युद्ध की तैयारी” बताया है और चीन व रूस के साथ संयुक्त नौसैनिक अभ्यास शुरू कर दिए हैं। यूरोपीय संघ ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। भारत जैसे देश, जो ईरान से तेल आयात करते हैं, इस पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर रखे हुए हैं क्योंकि इससे कच्चे तेल की कीमतों पर असर पड़ सकता है।

फिलहाल सवाल यही है—क्या यह सिर्फ दबाव की रणनीति है या आने वाले दिनों में हालात सचमुच सैन्य टकराव में बदलेंगे? दुनिया की नजरें अब वॉशिंगटन और तेहरान पर टिकी हैं।

news desk

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