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US-Iran Talks: ‘अमेरिका ने खोया भरोसा’-इस्लामाबाद शांति वार्ता के बेनतीजा होने पर भड़के ईरानी स्पीकर गालिबफ

तेहरान/इस्लामाबाद: अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध विराम के बाद हुई पहली सीधी शांति वार्ता किसी ठोस नतीजे पर पहुँचने में विफल रही है।

21 घंटे तक चली इस मैराथन बैठक के बाद ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबफ ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अमेरिका एक बार फिर ईरान का विश्वास जीतने में नाकाम रहा है।

21 घंटे का गतिरोध: परमाणु कार्यक्रम पर फंसा पेंच

शनिवार को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच गहन चर्चा हुई। जंग की शुरुआत के बाद यह पहला मौका था जब दोनों पक्ष मेज पर आमने-सामने थे।

हालांकि, 21 घंटे की बातचीत के बावजूद दोनों पक्ष अपने मतभेदों, विशेषकर ईरान के परमाणु कार्यक्रम (Nuclear Program) को लेकर जारी गतिरोध को दूर नहीं कर सके।

गालिबफ का सीधा हमला: “हमारे पास खोने को कुछ नहीं”

रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर सिलसिलेवार पोस्ट करते हुए गालिबफ ने ईरानी डेलिगेशन के प्रयासों की सराहना की, लेकिन अमेरिकी रवैये पर सवाल उठाए:

  • भरोसे की कमी: गालिबफ ने कहा, “पिछले दो युद्धों के कड़वे अनुभवों के कारण हमें दूसरी तरफ (अमेरिका) पर बिल्कुल भरोसा नहीं है। हमने अच्छी नीयत दिखाई, लेकिन वाशिंगटन हमारे तर्क समझने में विफल रहा।”
  • कूटनीति और सैन्य शक्ति का संगम: उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान की रणनीति केवल बातचीत तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा, “हम हर कदम को अपनी सैन्य शक्ति और कूटनीति के मिश्रण के रूप में देखते हैं। हम अपने राष्ट्रीय रक्षा अधिकारों से समझौता नहीं करेंगे।”

पाकिस्तान की भूमिका की सराहना

ईरानी स्पीकर ने इस कठिन समय में मध्यस्थ की भूमिका निभाने के लिए पाकिस्तान को ‘भाईचारा वाला देश’ बताते हुए धन्यवाद दिया। गौरतलब है कि पाकिस्तान ने ही अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के सीजफायर को लागू करवाने में अहम भूमिका निभाई थी।

सीजफायर के मुख्य बिंदु

  • हफ्तों चली जंग के बाद हमलों पर फिलहाल रोक।
  • वैश्विक व्यापार के लिए महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को फिर से खोलना।

आगे क्या? अमेरिका के सामने बड़ी चुनौती

गालिबफ के अनुसार, अब गेंद अमेरिका के पाले में है। उन्होंने कहा कि अमेरिका अब ईरान के सिद्धांतों को समझ चुका है और उसे यह तय करना होगा कि क्या वह ईरान का भरोसा जीतना चाहता है या तनाव को और बढ़ाना चाहता है।

सीजफायर के बावजूद दोनों ओर से तीखी बयानबाजी जारी है, जिससे संकेत मिलते हैं कि पश्चिम एशिया में शांति की राह अभी भी कांटों भरी है। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अपनी रक्षा क्षमताओं और मिसाइल प्रोग्राम को मजबूत करना जारी रखेगा।

news desk

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