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आज मस्कट में अमेरिका-ईरान की अहम बैठक, परमाणु मुद्दे पर बातचीत लेकिन तनाव बरकरार

अमेरिका और ईरान के बीच आज, यानी शुक्रवार को ओमान की राजधानी मस्कट में एक अहम बैठक होने जा रही है। उम्मीद जताई जा रही है कि बातचीत के ज़रिये दोनों देशों के बीच चल रहे विवाद को सुलझाने की कोशिश की जाएगी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह वार्ता मुख्य रूप से ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर केंद्रित रहेगी।

हालांकि, दोनों देशों के बीच तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है और बातचीत के एजेंडे को लेकर गहरे मतभेद बने हुए हैं। अमेरिका लगातार ईरान पर दबाव बना रहा है कि वार्ता में उसके मिसाइल कार्यक्रम, क्षेत्रीय प्रॉक्सी ग्रुप्स और मानवाधिकार मुद्दों को भी शामिल किया जाए, लेकिन ईरान ने इसे साफ तौर पर खारिज कर दिया है। ईरान का कहना है कि बातचीत केवल परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों को हटाने तक ही सीमित रहनी चाहिए।

गौरतलब है कि इस बैठक का स्थान पहले इस्तांबुल तय किया गया था, लेकिन बाद में इसे बदलकर ओमान कर दिया गया। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि वार्ताएं शुक्रवार सुबह 10 बजे मस्कट में होंगी। उन्होंने बैठक की व्यवस्था के लिए ओमान का आभार भी जताया। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और उनके दामाद जारेड कुशनेर शामिल होंगे।

इस पूरी प्रक्रिया में ओमान दोनों देशों के बीच मध्यस्थ की अहम भूमिका निभा रहा है। दरअसल, ईरान ने आखिरी समय में स्थान को इस्तांबुल से बदलकर ओमान करने की मांग की थी और बातचीत को द्विपक्षीय फॉर्मेट में रखने पर जोर दिया था।

उधर, डोनाल्ड ट्रंप ने एक ओर कूटनीति को प्राथमिकता देने की बात कही है, तो दूसरी ओर सैन्य कार्रवाई की चेतावनी भी दी है। ट्रंप का कहना है कि यदि समझौता नहीं हुआ तो ईरान के लिए हालात ‘बुरे’ हो सकते हैं और सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई को इसकी चिंता करनी चाहिए। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने बताया कि ट्रंप ईरान से ‘शून्य परमाणु क्षमता’ की मांग कर रहे हैं और उनके पास इसके लिए ‘अन्य कई विकल्प’ भी मौजूद हैं।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा है कि किसी भी संभावित समझौते में ईरान के मिसाइल कार्यक्रम, हमास और हिजबुल्लाह जैसे प्रॉक्सी संगठनों तथा देश के भीतर दमन के मुद्दों को शामिल किया जाना जरूरी है।

वहीं, ईरान का दावा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है, लेकिन अमेरिका और इजरायल इस पर लगातार संदेह जताते रहे हैं। इसके बावजूद हाल के दिनों में दोनों पक्षों के बीच तनाव और बढ़ता दिखाई दे रहा है।

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