अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी 3 दिनों की चीन विजिट करके वापस लौट चुके हैं। लेकिन असली धमाका तब हुआ जब उन्होंने ‘एयर फोर्स वन’ विमान में बैठे पत्रकारों को इनसाइड स्टोरी बताई। ट्रंप ने इस मीटिंग को ‘G-2’ मोमेंट अनाउंस कर दिया है यानी दुनिया की वो दो सुपरपावर्स, जो पूरी दुनिया का रुख बदल सकती हैं।
ट्रंप ने दावा किया कि शी जिनपिंग ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर काफी सख्त दिखे। उन्होंने साफ कहा कि ईरान के पास किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए। ग्लोबल ट्रेड की इस सबसे जरूरी लाइफलाइन “होर्मुज स्ट्रेट” को खुला रखने पर दोनों ने रजामंदी जताई, ताकि ग्लोबल बिजनेस में कोई रुकावट न आए।
जिनपिंग की दो टूक कहते हुए कहा की ताइवान के मुद्दे पर चीनी राष्ट्रपति ने रेड लाइन खींच दी है। उन्होंने वॉर्निंग दी कि अगर ताइवान ने आजादी की कोशिश की, तो यह एक बड़ा और भयंकर टकराव होगा। लेकिन ट्विस्ट ये है, ट्रंप के मुताबिक, जिनपिंग खुद भी युद्ध नहीं चाहते, क्योंकि उन्हें पता है कि अमेरिका-चीन की जंग पूरी दुनिया को ले डूबेगी।
ट्रंप चीन की ग्रैंड मेहमाननवाजी के मुरीद हो गए। उन्होंने एक मजेदार किस्सा शेयर किया कि बीजिंग के एक बगीचे में टहलते हुए उन्हें वहां के गुलाब के फूल बहुत पसंद आए। उसी अनौपचारिक माहौल में दोनों नेताओं के बीच काफी पर्सनल और स्ट्रेटेजिक बातें हुईं, जिसे ट्रंप दोनों देशों के रिश्तों का टर्निंग पॉइंट मान रहे हैं।
जैसे ही ट्रंप का ‘एयर फोर्स वन’ बीजिंग से रवाना हुए, वैसे ही क्रेमलिन से बड़ी खबर आ गई। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का चीन दौरा कन्फर्म हो चुका है। ट्रंप के जाते ही पुतिन की एंट्री ने ग्लोबल पॉलिटिक्स की बिसात पर एक नया सस्पेंस क्रिएट कर दिया है।
ट्रंप भले ही इसे एक बहुत बड़ी डिप्लोमैटिक जीत और अपनी शानदार केमिस्ट्री बता रहे हों, लेकिन डिफेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि पिक्चर अभी बाकी है। ताइवान और ईरान जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के बीच जो जमीनी कड़वाहट है, वो इतनी जल्दी खत्म नहीं होने वाली। देखना होगा कि इस ‘G-2’ केमिस्ट्री का असर ग्लोबल मार्केट पर क्या पड़ता है।
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