अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुआ युद्धविराम समझौता अब गंभीर संकट में घिरता नजर आ रहा है। तेल निर्यात पर दी गई अस्थायी छूट वापस लेने के अमेरिकी फैसले ने दोनों देशों के बीच तनाव को एक बार फिर चरम पर पहुंचा दिया है। ईरान ने इसे न सिर्फ समझौते का उल्लंघन बताया है, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भी बड़ा खतरा करार दिया है।
ईरान के विदेश मंत्रालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अमेरिकी वित्त विभाग द्वारा जनरल लाइसेंस रद्द करना 18 जून 2026 को हुए युद्धविराम समझौते के अनुच्छेद-10 का स्पष्ट उल्लंघन है। तेहरान का आरोप है कि वाशिंगटन ने महज 20 दिनों के भीतर अपनी प्रतिबद्धताओं से पीछे हटकर अपनी नीतिगत अस्थिरता और अविश्वसनीयता को फिर उजागर कर दिया है।
मंत्रालय ने यह भी कहा कि समझौते के बाद ईरान ने पूरी ईमानदारी से अपनी जिम्मेदारियां निभाईं, लेकिन अमेरिका लगातार बहाने बनाकर अपने दायित्वों से बचता रहा। ईरान ने यह भी आरोप लगाया कि इस दौरान अमेरिका ने प्रत्यक्ष रूप से या इजरायल के जरिए क्षेत्र में तनाव को बढ़ावा दिया।
इस बीच जमीनी हालात भी तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं। दक्षिणी ईरान के सिरिक, केशम द्वीप और बंदर अब्बास में कई धमाकों की खबरों ने हालात को और संवेदनशील बना दिया है। सरकारी मीडिया के मुताबिक सिरिक के एक व्यावसायिक बंदरगाह पर संदिग्ध प्रोजेक्टाइल के गिरने से कई लोग घायल हो गए, जिन्हें नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
ईरान ने चेतावनी दी है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाने का अधिकार रखता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द ही कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो यह टकराव पूरे पश्चिम एशिया में व्यापक अस्थिरता का कारण बन सकता है।
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