बुधवार (8 जुलाई, 2026) का दिन भारतीय शेयर बाजार के निवेशकों के लिए किसी बुरे सपने की तरह शुरू हुआ। मिडिल ईस्ट (Middle East) में गहराते युद्ध के बाद वैश्विक बाजारों से मिले बेहद खराब संकेतों के कारण भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी औंधे मुंह गिर पड़े। बाजार खुलने के शुरुआती 10 मिनटों के भीतर ही सेंसेक्स 625 अंकों से ज्यादा टूट गया, जिसने निवेशकों की संपत्ति से ₹2.79 लाख करोड़ झटके में साफ कर दिए। यह बाजार में लगातार दूसरे दिन की बड़ी गिरावट है।
| इंडेक्स (Index) | वर्तमान स्तर | कारोबारी सत्र का निचला स्तर (Day’s Low) | कुल गिरावट |
| BSE Sensex | 77,621.92 | 77,555.52 | -559 अंक |
| NSE Nifty | 24,238.25 | 24,207.20 | -159 अंक |
1. अमेरिका-ईरान के बीच सीधी सैन्य जंग इस तबाही की सबसे बड़ी वजह अमेरिका द्वारा बुधवार तड़के ईरान पर किए गए ताबड़तोड़ हमले हैं। अमेरिका का दावा है कि ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में तीन जहाजों को निशाना बनाया था, जिसके जवाब में यह कार्रवाई की गई। वहीं, एपी (AP) की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने भी बहरीन और कुवैत पर जवाबी हमले किए हैं। इस टकराव से पूरी दुनिया में अनिश्चितता का माहौल है।
2. कच्चे तेल (Crude Oil) में भयंकर उबाल युद्ध की खबरों के बीच सप्लाई चेन रुकने के डर से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) 2.6% बढ़कर $76.1 प्रति बैरल पर पहुंच गया। इससे पिछले सत्र में भी तेल 3% महंगा हुआ था। भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा तेल आयात करता है, इसलिए तेल का महंगा होना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका है।
3. ‘डर का पैमाना’ (India VIX) 7% उछला बाजार में घबराहट और अनिश्चितता को मापने वाला इंडेक्स ‘India VIX’ बुधवार सुबह अचानक 7% से ज्यादा उछलकर 12.47 के स्तर पर पहुंच गया। वीआईएक्स का बढ़ना साफ संकेत देता है कि ट्रेडर्स आने वाले दिनों में और बड़े उतार-चढ़ाव की आशंका से डरे हुए हैं।
4. रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर पर जियोपॉलिटिकल तनाव और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़त के कारण विदेशी निवेशकों ने तेजी से हाथ खींचना शुरू कर दिया है। नतीजतन, भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 20 पैसे टूटकर 95.17 के ऑल-टाइम लो लेवल पर खुला।
बाजार का कुल रुख पूरी तरह से नकारात्मक (Negative) रहा, जहां नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर 1,574 शेयरों में गिरावट देखी गई, जबकि केवल 749 शेयर ही हरे निशान में टिक पाए।
फुटबॉल और अन्य खबरों के बीच दलाल स्ट्रीट पर नजर रखने वाले विश्लेषकों का मानना है कि जब तक मिडिल ईस्ट से तनाव कम होने की खबर नहीं आती, तब तक बाजारों में रिकवरी की उम्मीद बेहद कम है।
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