लखनऊ| उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साइबर अपराध के बढ़ते मामलों को देखते हुए प्रदेश की जनता के नाम एक विशेष सुरक्षा संदेश जारी किया है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया के असुरक्षित उपयोग और ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे फर्जीवाड़ों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए नागरिकों से सतर्क रहने की अपील की है।
सोशल मीडिया पर ‘प्राइवेसी’ को लेकर जताई चिंता
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि आज के दौर में तकनीक हमारी सुविधा के लिए है, लेकिन अपराधियों ने इसे अपना हथियार बना लिया है। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर चिंता जताया कि लोग अक्सर अपनी निजी तस्वीरें, बच्चों के वीडियो और पल-पल की लोकेशन सोशल मीडिया पर सार्वजनिक कर देते हैं।
योगी आदित्यनाथ ने आगाह करते हुए कहा, ‘आपकी साझा की गई ये निजी यादें अपराधियों के लिए आपको टारगेट करने का ज़रिया बन सकती हैं। रीयल-टाइम लोकेशन साझा करना अपराधियों को आपके घर तक पहुँचने का रास्ता देने जैसा है’।
‘डिजिटल अरेस्ट’ की हकीकत: घबराएं नहीं, फोन काटें
प्रदेश में बढ़ रहे ‘डिजिटल अरेस्ट’ के मामलों पर मुख्यमंत्री ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि कानून में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। जालसाज पुलिस या CBI की नकली वर्दी पहनकर वीडियो कॉल के जरिए दबाव बनाते हैं।
सीएम ने आगे कहा कि कोई भी सरकारी एजेंसी व्हाट्सएप कॉल के जरिए किसी को गिरफ्तार नहीं करती और न ही पैसे की मांग करती है।
अपराधी पीड़ित को कैमरा चालू रखने की धमकी देते हैं, जो पूरी तरह गैरकानूनी है। ऐसे कॉल आते ही नागरिकों को तुरंत फोन काट देना चाहिए।
UP सरकार का सुरक्षा कवच
नागरिकों को आश्वस्त करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार साइबर सुरक्षा को लेकर अत्यंत गंभीर है।
प्रदेश के सभी 75 जिलों में अब विशेष साइबर पुलिस स्टेशन क्रियाशील हैं। जनता की सुविधा के लिए स्थानीय थानों में ‘साइबर हेल्प डेस्क’ बनाई गई है जहाँ तुरंत शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
मुख्यमंत्री की सुरक्षा सलाह
अगर आप ठगी का शिकार हों, तो बिना समय गंवाए 1930 हेल्पलाइन नंबर पर शिकायत करें। सोशल मीडिया अकाउंट्स को ‘प्राइवेट’ रखें और अनजान लोगों को अपनी लिस्ट में शामिल न करें। अपना ओटीपी (OTP) या बैंकिंग डिटेल्स किसी भी सिचुएशन में शेयर न करें।