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एक डोज़, दो ज़िंदगी का वरदान: यूपी में गंभीर एनीमिया से जूझ रही गर्भवती महिलाओं के लिए नई पहल

लखनऊ, 23 अप्रैल 2026: उत्तर प्रदेश सरकार ने “एक डोज़, दो ज़िंदगी का वरदान” के संकल्प के साथ गर्भवती महिलाओं में गंभीर एनीमिया के उपचार को और प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इसी कड़ी में आज लखनऊ में स्वास्थ्य विभाग, उत्तर प्रदेश और ग्लोबल हेल्थ स्ट्रेटजीज द्वारा राज्य स्तरीय मीडिया संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग, अमित कुमार घोष ने की। कार्यशाला में स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ, सहयोगी संस्थाएं और मीडिया प्रतिनिधि शामिल हुए।

अमित कुमार घोष ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य सरकार एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत एनीमिया नियंत्रण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने बताया कि अब गंभीर एनीमिया से ग्रसित गर्भवती महिलाओं के लिए इंट्रावीनस फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज (IV-FCM) की शुरुआत की जा रही है, जिसकी एक खुराक से आयरन की कमी का तेज और प्रभावी उपचार संभव है। वर्ष 2026 के लिए प्रदेश में 3.7 लाख इंट्रावीनस आयरन की खुराकें उपलब्ध कराई गई हैं, जिन्हें जरूरतमंद महिलाओं तक पहुंचाया जाएगा।

उन्होंने बताया कि एनीमिया नियंत्रण के लिए राज्य में 6x6x6 मॉडल के तहत 6 लाभार्थी समूहों, 6 प्रमुख हस्तक्षेपों और 6 संस्थागत व्यवस्थाओं पर काम किया जा रहा है। साथ ही एएनएम, आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से आयरन-फोलिक एसिड सप्लीमेंटेशन, डीवॉर्मिंग, पोषण परामर्श और जांच सेवाओं को सुदृढ़ किया गया है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के अनुसार प्रदेश में 83.4 प्रतिशत प्रसव सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में हो रहे हैं।

महानिदेशक, परिवार कल्याण डॉ. हरिदास अग्रवाल ने बताया कि प्रदेश में गर्भवती महिलाओं में एनीमिया की दर NFHS-3 के 52 प्रतिशत से घटकर NFHS-5 में 46 प्रतिशत हो गई है। किशोरियों और बच्चों में भी एनीमिया के मामलों में कमी दर्ज की गई है। वहीं एनीमिया मुक्त भारत स्कोरकार्ड 2024-25 के अनुसार, गर्भवती महिलाओं में आयरन-फोलिक एसिड सप्लीमेंटेशन की कवरेज 95 प्रतिशत तक पहुंच गई है।

महानिदेशक प्रशिक्षण डॉ. रंजना खरे ने बताया कि 10,000 से अधिक चिकित्सा अधिकारियों और स्टाफ नर्सों को IV-FCM सहित नवीन प्रोटोकॉल पर प्रशिक्षित किया जा चुका है। विशेषज्ञों ने मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने, समय पर जांच और उपचार सुनिश्चित करने तथा समुदाय स्तर पर जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया।

कार्यक्रम में मीडिया से अपील की गई कि वे एनीमिया के लक्षणों और उपचार के प्रति जागरूकता फैलाने में सक्रिय भूमिका निभाएं, ताकि समय रहते गर्भवती महिलाओं को उचित देखभाल मिल सके और मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाई जा सके।

news desk

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