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यूपी में जातिगत भेदभाव खत्म करने सरकार की बड़ी पहल, अब न होगा दस्तावेज़ों में जाति का जिक्र, न होंगी जाति आधारित रैलियां

news desk
Last updated: September 22, 2025 11:14 am
news desk
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यूपी में जातिगत भेदभाव खत्म करने सरकार की बड़ी पहल
यूपी में जातिगत भेदभाव खत्म करने सरकार की बड़ी पहल
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उत्तर प्रदेश में जातिगत भेदभाव को जड़ से खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. इलाहाबाद हाईकोर्ट के हालिया ऐतिहासिक फैसले के बाद राज्य सरकार ने आदेश जारी करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि अब किसी भी सरकारी दस्तावेज, पुलिस रिकॉर्ड या सार्वजनिक स्थल पर जाति का उल्लेख नहीं किया जाएगा.

मुख्य सचिव ने 21 सितंबर 2025 को इस संबंध में 10 बिंदुओं वाला आदेश जारी किया है. इसके तहत एफआईआर, गिरफ्तारी मेमो, चार्जशीट जैसे पुलिस दस्तावेजों में जाति का जिक्र पूरी तरह से हटाया जाएगा. आरोपी की पहचान के लिए अब माता-पिता का नाम, आधार कार्ड, फिंगरप्रिंट और मोबाइल नंबर जैसे आधुनिक साधनों का उपयोग किया जाएगा.

जाति आधारित रैलियों और कार्यक्रमों पर रोक

सरकारी आदेश के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में अब जाति आधारित रैलियों और सार्वजनिक कार्यक्रमों पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है. साथ ही सोशल मीडिया या इंटरनेट पर जाति का महिमामंडन करने वाले या नफरत फैलाने वाले कंटेंट पर आईटी एक्ट के तहत कार्रवाई होगी.


कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

19 सितंबर 2025 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने प्रवीण छेत्री बनाम राज्य मामले में फैसला सुनाया है. याचिकाकर्ता ने अपनी गिरफ्तारी के दौरान एफआईआर और जब्ती मेमो में जाति (भील) लिखे जाने पर आपत्ति जताई थी. अदालत ने इसे संवैधानिक नैतिकता के खिलाफ बताते हुए कहा कि जाति का महिमामंडन ‘राष्ट्र-विरोधी’ है. कोर्ट ने यह भी साफ किया कि पहचान के लिए जाति की जरूरत नहीं, जब आधुनिक साधन उपलब्ध हैं.

मुख्य सचिव के आदेश के प्रमुख बिंदु

• पुलिस रिकॉर्ड्स और एफआईआर में बदलाव – अब किसी भी दस्तावेज़ में जाति नहीं लिखी जाएगी.
• NCRB और CCTNS सिस्टम में बदलाव – जाति वाले कॉलम को हटाने या खाली रखने की अपील की जायेगी.
• सार्वजनिक स्थलों से जातीय संकेत हटेंगे – थानों के नोटिस बोर्ड, वाहनों और सरकारी बोर्ड से जाति आधारित नारे और प्रतीक हटाए जाएंगे.
• रैलियों और सोशल मीडिया पर सख्ती – जाति आधारित कार्यक्रम पर प्रतिबंध और जाति का महिमामंडन या नफरत फैलाने वाले कंटेंट पर आईटी एक्ट के तहत कार्रवाई होगी.
• विशेष छूट – एससी/एसटी एक्ट जैसे मामलों में जहां जाति का उल्लेख कानूनी रूप से आवश्यक है, वहां छूट रहेगी.
•
राज्य सरकार का यह फैसला समाज में समानता और न्याय की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है, लोगों का मानना है कि यदि इसे सख्ती से लागू किया गया, तो जातिगत भेदभाव की खाई को पाटने और सामाजिक सौहार्द बढ़ाने में यह एक ऐतिहासिक पहल साबित हो सकती है.

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