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असुरक्षित यौन संबंध या गंदा पानी? हरियाणा के छायंसा गांव में 12 मौतों के बाद जांच तेज, ग्रामीणों में डर

पलवल। हरियाणा के पलवल जिले के छायंसा गांव में पिछले 15 दिनों में 12 लोगों की मौत से इलाके में दहशत का माहौल है। स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार गांव में कैंप लगाकर जांच और उपचार में जुटी है।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, टीकाकरण किया जा रहा है और लोगों को जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है, ताकि मौतों की कड़ी को रोका जा सके।

नोडल अधिकारी बासुदेव और पीएचसी कैंप प्रभारी देवेंद्र जाखड़ ने एक न्यूज चैनल से बातचीत में बताया कि पूरे गांव के लोगों की स्क्रीनिंग की जा रही है।

अब तक करीब 600 लोगों की जांच की गई है, जिसमें 29 लोगों में हेपेटाइटिस-सी और तीन लोगों में हेपेटाइटिस-बी संक्रमण की पुष्टि हुई है। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार ये संक्रमण आमतौर पर संक्रमित खून या असुरक्षित यौन संबंध के कारण फैलते हैं।

हालांकि, गांव के कुछ लोगों का दावा है कि मौतों की वजह दूषित पानी हो सकता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि गांव में पानी की गुणवत्ता को लेकर लंबे समय से शिकायतें हैं।

फिलहाल प्रशासन ने पानी के सैंपल भी जांच के लिए भेजे हैं और रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।उधर, गांव के कई लोग इन मौतों के पीछे दूषित पानी को वजह मान रहे हैं।

ग्रामीण हकीमुद्दीन ने बताया कि 24 वर्षीय दिलशाद की 11 फरवरी को मौत हो गई। उनके अनुसार, दिलशाद को दो दिन पहले बुखार आया था, जिसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन 48 घंटे के भीतर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

हकीमुद्दीन का कहना है कि गांव के चारों ओर पानी भरा रहता है। पीने का पानी टैंकरों से आता है, जिसे लोग घरों में जमा कर महीनों तक इस्तेमाल करते हैं। उन्हें आशंका है कि लंबे समय तक स्टोर किया गया पानी ही बीमारी फैलने की वजह हो सकता है।

आरिफ ने बताया कि उनकी पत्नी को भी हेपेटाइटिस हुआ था, हालांकि अब वह स्वस्थ हो चुकी हैं। उनका कहना है कि गांव से होकर एक नहर गुजरती है और दूषित पानी खेतों में इस्तेमाल होता है, जिससे संक्रमण फैलने की आशंका है।

बीमारी के बाद गांव में डर का माहौल है। अली शेर ने बताया कि जांच में उनमें हेपेटाइटिस-सी की पुष्टि हुई है, जबकि उनकी पत्नी पीलिया से पीड़ित हैं। उन्होंने कहा कि बीमारी कैसे हुई, यह डॉक्टर ही बता सकते हैं।

“ऐसा नहीं है कि हमने कोई गलत काम किया हो। पहले गुटखा खाते थे, लेकिन अब पानी की समस्या को देखते हुए आरओ और बोतलबंद पानी पी रहे हैं। फिर भी बेचैनी और सिर भारी रहने की शिकायत है,” उन्होंने कहा। उनके मुताबिक, गांव में अब तक 20 से 22 लोगों की मौत हो चुकी है और लोगों में भय का माहौल है।

इसी तरह 14 वर्षीय शारिक की 27 जनवरी को मौत हो गई। परिजनों के अनुसार, उसे पहले बुखार और उल्टी की शिकायत हुई थी, जिसके बाद उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। शारिक की मां आसुदी ने स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब उनका बेटा अस्पताल ले जाया गया, तब उसकी हालत इतनी गंभीर नहीं थी, लेकिन उचित उपचार और सुविधाओं के अभाव में उसकी जान चली गई।

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