लखनऊ। उन्नाव रेप केस में सजायाफ्ता पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की आजीवन कारावास की सजा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया और शीर्ष अदालत ने इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें सेंगर की सजा से जुड़ा फैसला दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट के इस कदम के बाद देशभर में एक बार फिर इस बहुचर्चित मामले को लेकर बहस तेज हो गई है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सोशल मीडिया पर कुलदीप सिंह सेंगर के समर्थन और विरोध में प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। इसी बीच उन्नाव रेप केस की पीड़िता ने सार्वजनिक रूप से एक भावुक अपील करते हुए कहा है कि अपराध किसी जाति या समाज से जुड़ा नहीं होता, बल्कि यह व्यक्ति विशेष की जिम्मेदारी होती है।
पीड़िता ने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें 11 जनवरी को दिल्ली के जंतर-मंतर पर कुलदीप सिंह सेंगर के समर्थन में उनकी बेटियों द्वारा कथित रूप से क्षत्रिय सम्मेलन बुलाए जाने का दावा किया गया है। पीड़िता का कहना है कि इस तरह के आयोजन पीड़ितों की पीड़ा को और गहरा करते हैं।
पीड़िता ने खासतौर पर क्षत्रिय समाज से अपील करते हुए कहा कि वह स्वयं भी उसी समाज से ताल्लुक रखती हैं और एक साधारण, गरीब परिवार की बेटी हैं। उन्होंने कहा,“मैं भी क्षत्रिय समाज की बेटी हूं, मैं भी इस देश की बेटी हूं। कृपया मेरी आवाज बनिए। अपराधी की कोई जाति नहीं होती।”
पीड़िता ने यह भी कहा कि किसी भी समाज को न्याय के पक्ष में खड़ा होना चाहिए, न कि ऐसे व्यक्ति के समर्थन में, जिसे अदालत दोषी ठहरा चुकी है। उन्होंने मांग की कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों के मामलों में समाज और सिस्टम दोनों को संवेदनशीलता दिखानी चाहिए।
गौरतलब है कि उन्नाव रेप केस ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। इस मामले में पीड़िता और उसके परिवार ने न्याय के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी। सुप्रीम कोर्ट का ताजा आदेश एक बार फिर इस केस को चर्चा के केंद्र में ले आया है, वहीं पीड़िता की अपील ने समाज के सामने नैतिक और सामाजिक सवाल खड़े कर दिए हैं।